समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू करते हुए नियमित शिक्षकों की तर्ज पर सेवानिवृत्ति लाभ जारी करने की मांग करते हुए गेस्ट शिक्षक के तौर पर रिटायर शिक्षिका की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
यह भी पढ़ें: Chandigarh: चंडीगढ़ में विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने की दर देशभर में सबसे कम, दो साल का आंकड़ा शून्य
यमुनानगर की कल्पना ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि उसे 9 नवंबर 2006 को टीजीटी अतिथि शिक्षिका के रूप में नियुक्त किया गया था। 31 जनवरी 2023 को वह सेवानिवृत्ति तक इसी पद पर काम करती रही। उसने उन कर्तव्यों का निर्वहन किया है जिन पर एक नियमित टीजीटी ने कर्तव्यों का पालन किया है। सेवानिवृत्ति के बाद उसे नियमित शिक्षकों को मिलने वाले लाभ से वंचित कर दिया गया। याची ने कहा कि समान कार्य समान वेतन के सिद्धांत के आधार पर वह पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण, चिकित्सा भत्ता, एलटीसी, डीए जैसे भत्तों की हकदार है जिससे उसे वंचित किया जा रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को निर्देश जारी किया जाए कि उसे यह लाभ जारी करें।
याचिका में गेस्ट टीचर सेवा की 12 मार्च 2019 की अधिसूचना को भी चुनौती दी गई है। यह अधिसूचना गेस्ट टीचर को वेतनमान के लाभों के साथ-साथ अन्य लाभों के दावे से वंचित करती है। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता और अन्य अतिथि शिक्षकों के पास 12 मार्च 2019 की अधिसूचना के नियमों और शर्तों को स्वीकार करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था। यह याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकार और भारत के संविधान के दिए गए अधिकारों का उल्लंघन करती हैं। हाईकोर्ट ने याचिका पर अब हरियाणा सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।