पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया है कि कर्मचारी की गलती न होने पर काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने कर्मचारी की याचिका को स्वीकार करते हुए 2012 से लंबित वेतन को छह प्रतिशत ब्याज सहित देने का पंजाब सरकार को आदेश दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता को हुई इस परेशानी के लिए लुधियाना के होमगार्ड कमांडेंट को जमकर फटकार लगाई।
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याचिका दाखिल करते इंद्रजीत सिंह ने बताया था कि वह पंजाब में स्पेशल पुलिस ऑफिसर के तौर पर कार्यरत था। स्पेशल पुलिस ऑफिसर पंजाब पुलिस में नियमित होने के लिए आवश्यक योग्यता पूरी नहीं करते थे। ऐसे में इन्हें होमगार्ड में भेजने का निर्णय लिया गया था। याचिकाकर्ता को लुधियाना पुलिस कमिश्नर ने 3 अगस्त 2012 को स्पेशल पुलिस ऑफिसर के तौर पर रिलीव किया था लेकिन लुधियाना के होमगार्ड कमांडेंट ने उसे यह कहते हुए ज्वाइन कराने से इन्कार कर दिया कि उसने देरी से रिपोर्टिंग की है। हाईकोर्ट को बताया गया कि जिस दिन उसे रिलीव किया गया था उसी दिन उसने लुधियाना में रिपोर्ट किया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता केवल एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर था और ऐसे में उसके हाथ में कुछ नहीं था। जिस दिन उच्च अधिकारी ने उसे रिलीव किया उसी दिन वह ड्यूटी संभालने पहुंच गया था। होमगार्ड लुधियाना के कमांडेंट की इस दलील को हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया कि पुलिस की देरी के साथ उनका कोई लेना-देना नहीं है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को अगस्त 2012 से नियुक्ति देने का आदेश दिया है। पंजाब सरकार ने इस पर काम नहीं तो वेतन नहीं सिद्धांत के आधार पर वित्तीय लाभ जारी करने का विरोध किया। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता की कोई गलती नहीं थी। ऐसे में कर्मचारी की गलती न होने पर यह सिद्धांत लागू नहीं होता।