शिक्षकों की वरिष्ठता के विवाद को लेकर फरवरी 2023 में जारी हाईकोर्ट के आदेश का पालन न करना पंजाब सरकार को भारी पड़ गया। बिना संशोधन 50 हजार शिक्षकों की वरिष्ठता सूची जारी करने पर पंजाब सरकार घिर गई है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार व अन्य को अवमानना नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
एडवोकेट विकास चतरथ के माध्यम से अवमानना याचिका दाखिल करते हुए माला सूद व अन्य ने पंजाब सरकार पर हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना के तहत कार्रवाई करने का निर्देश जारी करने की अपील की है। हाईकोर्ट को बताया गया कि उनकी याचिका का निपटारा करते हुए अदालत ने पंजाब सरकार को वरिष्ठता से जुड़े विवाद का निपटारा करते हुए उचित वरिष्ठता सूची तैयार करने का आदेश दिया था।
कोर्ट ने आदेश का पालन करने के लिए पंजाब सरकार को छह माह की मोहलत दी थी। कोर्ट को बताया गया कि यह विवाद 50 हजार से अधिक शिक्षकों की वरिष्ठता से जुड़ा है। बावजूद इसके पंजाब सरकार इस विषय को लेकर गंभीर नहीं है और बिना किसी संशोधन पहले से तैयार वरिष्ठता सूची को टेंटेटिव सूची के तौर पर जारी कर दिया गया।
ऐसे वरिष्ठता देने पर है विवाद
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में नई वरिष्ठता सूची पंजाब राज्य शिक्षा वर्ग (स्कूल कैडर) सेवा नियम, 1978 के अनुसार सभी प्रभावित उम्मीदवारों को सुनवाई और आपत्ति दर्ज करने का अवसर देने के बाद लागू करने का आदेश दिया था। 1994 की भर्ती के सभी उम्मीदवारों को दो दिसंबर 1986 से, तो वहीं 1996 की भर्ती नोटिस के सभी उम्मीदवारों को एक जनवरी 1997 से नियुक्ति मान लिया गया था। इस पूरी प्रक्रिया को याचिकाकर्ताओं ने नियमों का स्पष्ट उल्लंघन बताया था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं बदली सूची
हाईकोर्ट ने कहा था कि सरकार के आदेश में स्पष्ट त्रुटियां हैं। याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि शिक्षकों को उस तारीख से वरिष्ठता प्रदान की गई थी जिस तारीख को वे कैडर में नहीं हुए थे। बहस के दौरान याची के वकील विकास चतरथ ने बेंच को बताया कि हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश के बाद भी सरकार ने इस सूची में कोई बदलाव नहीं किया और इसे ही टेंटेटिव वरिष्ठता सूची मान लिया जो उचित नहीं है। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब देने का आदेश दिया।