पंजाब में लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर भाजपा ने बुधवार को कई बैठकें कीं। सबसे पहले जिला प्रधानों और प्रभारियों की बैठक प्रदेश नेतृत्व के साथ हुई। जिसमें भाजपाइयों ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।
उन्होंने कहा कि भाजपा को शिअद से अलग होकर विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए। अगर गठबंधन नहीं तोड़ना तो भाजपा के नेता मंत्री और चेयरमैन समेत सारे पद छोड़कर सरकार से बाहर आएं। ताकि पार्टी सरकार के कामकाज की सही ढंग से समीक्षा कर उसकी खुलकर आलोचना कर सके।
पार्टी ने फीडबैक लेने के लिए बैठक बुलाई थी, जिसमें नेताओं का रोष खुलकर सामने आया। भाजपा नेताओं का कहना था कि गठबंधन सरकार में उनके कोई काम नहीं होते। शिअद तो छोड़ो भाजपा के मंत्री भी वर्करों को तवज्जो नहीं देते हैं। शहरियों के विरोधी फैसले लेने के कारण आज पार्टी की यह हालत हुई है।
लोगों के सामने पार्टी नेताओं की स्थिति खराब हो रही है। भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रॉपर्टी टैक्स हर हालत में हटना चाहिए। इसको लेकर अरुण जेटली भी वादा कर चुके हैं। उनका कहना था कि ड्रग्स, अपराध, अवैध कालोनियों का मुद्दा, किसानों को मुफ्त बिजली देकर शहरियों पर बोझ डालना आदि ने भाजपा को नुकसान पहुंचाया।
कुछ नेताओं ने तो यहां तक कह दिया कि भाजपा तो शिअद की कठपुतली बन गई है। निचले स्तर पर मिले इस फीडबैक के बाद प्रदेश नेतृत्व की मीटिंग हुई। शाम को पार्टी की कोर कमेटी ने भी मीटिंग की। जल्द ही सारा फीडबैक केंद्रीय नेतृत्व को दिया जाएगा।
जनता से जुड़े मुद्दे उठाएगी भाजपा
चंडीगढ़। प्रदेश भाजपा प्रधान कमल शर्मा ने बैठक में कहा कि पार्टी जनता से जुड़े मुद्दे उठाएगी। मुख्यमंत्री बादल द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स रिव्यू करने का वादा स्वागत करने योग्य है। लोकसभा चुनाव में भाजपा लोगों के बीच विकास, सुशासन व सशक्त नेतृत्व को लेकर गई। नतीजतन तीस साल बाद देश में एक दल के बहुमत वाली सरकार गठित हुई। उन्होंने कहा कि इसका फायदा पंजाब को भी मिलेगा। जल्द विकास योजनाएं शुरू होंगी। मीटिंग में अजय जमवाल, लक्ष्मीकांता चावला, राकेश राठौर, तरुण चुघ, गुरचरन कौर, विनोद शर्मा व सुभाष शर्मा भी मौजूद थे।