किसान नेताओं के साथ सीएम भगवंत मान की बैठक।
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पंचायत जमीनों पर अवैध कब्जा छुड़ाने में किसानों के आगे पंजाब सरकार झुक गई है। पंजाब सरकार ने कब्जा छोड़ने की अंतिम तिथि 31 मई से बढ़ाकर 30 जून कर दी है। साथ ही कब्जा हटाने से पहले कब्जेधारी को 15 दिन का नोटिस अब सरकार को देना होगा। पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 31 मई तक कब्जा नहीं छोड़ने पर मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दी थी।
पंजाब सरकार ने पंचायत की जमीनों पर कब्ज मुक्त करने की मुहिम छेड़ रखी है। पहले चरण में 5000 एकड़ पंचायती जमीन को कब्जा मुक्त कराने का लक्ष्य सरकार की ओर से रखा गया था। पंचायत मंत्री कुलदीप धालीवाल स्वयं प्रदेश में पंचायत की कब्जे में जमीनों को खाली करा रहे हैं। सरकार की इस मुहिम का अब किसान जमकर विरोध कर रहे हैं।
किसानों के बढ़ते विरोध को देखते हुए सोमवार को पंजाब भवन में किसानों और सरकार के बीच बैठक हुई। इसमें किसानों के दबाव के बाद सरकार ने कब्जा छोड़ने के लिए एक महीने की मोहलत और दे दी है। इसके अलावा अब किसी भी अवैध कब्जे को हटाने से पहले 15 दिन का नोटिस देना होगा।
बैठक के बाद किसान नेता हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने बताया कि कई किसान वर्षों से पंचायती जमीन पर खेती कर रहे हैं। किसानों ने जमीनों पर अपने आवास भी बना रखे हैं। अगर सरकार उन्हें नोटिस देती है तो उनके पास 15 दिन का समय होगा, वे जिला विकास और पंचायत अधिकारी के पास पेश होकर मालिकाना हक का दावा कर सकते हैं।
साझा समिति का होगा गठन
बैठक में यह भी तय हुआ कि पंचायत जमीन में अवैध कब्जों को लेकर किसानों और सरकार के नुमाइंदों को लेकर एक साझा समिति का गठन किया जाएगा। समिति के जरिये प्रदेश में पंचायत जमीन पर हुए कब्जों की जांच की जाएगी। समिति में तीन किसानों के सदस्य, तीन अधिकारी और एक सदस्य राजस्व विभाग का शामिल किया जाएगा।
अब तक 2600 एकड़ भूमि हुई कब्जा मुक्त
ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री ने बताया कि अब तक 8000 एकड़ पंचायती जमीनों से अवैध कब्जे हटाने के लिए कागजी कार्रवाई पूरी की जा चुकी है। ये वे जमीनें हैं जिनके केस नाजायज कब्जाधारक सभी अदालतों में हार चुके हैं। अब तक 2600 एकड़ पंचायती जमीन से नाजायज कब्जे छुड़वाए जा चुके हैं।