सदन में इस प्रस्ताव पर पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने चर्चा में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि भाजपा अपने विरोधियों को निशाना बनाने के लिए आरडीएफ रोकने जैसे घटिया हथकंडे अपना रही है। इस तथ्य के बावजूद कि मौजूदा राज्य सरकार ने पिछली सरकारों की सभी त्रुटियों को दूर कर दिया है, केंद्र ने अभी तक फंड जारी नहीं किया। मान ने कहा कि उन्होंने खुद केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की, जिन्होंने भरोसा दिया था कि यह फंड जल्द ही जारी कर दिया जाएगा। यह भरोसा हकीकत में कभी भी नहीं बदला और केंद्र सरकार ने राज्य के 3622.40 करोड़ रुपये रोक रखे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में सबसे अधिक योगदान देने वाले राज्य के फंडों को केंद्र रोक रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह उन महान राष्ट्रीय नायकों के अथाह योगदान का सत्कार है जिन्होंने मातृभूमि की खातिर अपनी कीमती जान न्यौछावर कर दी थी? मान ने किसानों की फसल खरीदने से अपने हाथ खींचने के लिए भी केंद्र पर तीखा हमला बोला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय खरीद एजेंसियों की तरफ से राज्य के किसानों को किसी न किसी बहाने परेशान किया जाता है और मूल्य कटौती की जाती है। पंजाब सरकार ने राज्य के किसानों को मूल्य कटौती के एवज में मुआवजा देकर उनके हितों की रक्षा की। मान ने कहा कि अगर राज्य के किसान इन एजेंसियों को अनाज बेचने से ही मना कर दें तो केंद्र सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए अनाज कहां से लाएगी?
सदन में राज्यपाल की लिखी चिट्ठियां दिखाई मान ने
मुख्यमंत्री मान मंगलवार को सूबे के राज्यपाल द्वारा उन्हें विभिन्न मुद्दों पर लिखी गई चिट्ठियां लेकर पहुंचे। बकाया आरडीएफ पर सदन में लाए गए प्रस्ताव पर उन्होंने सदस्यों को चिट्ठियां दिखाते हुए कहा कि यह देखिए राज्यपाल ने मुझे लव-लेटर लिखे हैं। खाली बैठे-बैठे वे चिट्ठियां ही लिखते रहते हैं। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि राज्यों में अपने गलत मंसूबे पूरे करने के लिए केंद्र ने एक ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति की हुई है, जिसे राज्यपाल के तौर पर जाना जाता है।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल को ऐसे पत्र लिखने के बजाय आरडीएफ जैसे मुद्दों को केंद्र के समक्ष हल करवाने के लिए कोशिश करनी चाहिए। वास्तव में यह राजभवन अब राज्य के मामलों में दखल देने के लिए भाजपा के प्रांतीय मुख्यालय के तौर पर उभरकर सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल चुनी हुई सरकारों के काम में अनावश्यक बाधा पैदा कर रहे हैं। राज्य के हितों की रक्षा करने के बजाय पंजाब यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर भी राज्यपाल हरियाणा के पक्ष में खड़े नजर आए।