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Punjab: एनओसी खत्म करने से मिलेगी राहत, आर्किटेक्ट से लेकर ऑनलाइन आवेदन तक में फंसे रहते थे लोग

Wed, 07 Feb 2024 08:23 AM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

सीएम भगवंत मान ने मंगलवार को किसी भी किस्म की ज़मीन जायदाद की रजिस्ट्रेशन के लिए कोई नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट   (एनओसी) की शर्त खत्म करने का एलान किया था। मान ने कहा था कि यह फैसला आम लोगों की सलाह के बाद लिया गया है।
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एनओसी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब में एनओसी को खत्म करने की घोषणा से लोगों ने राहत की सांस ली है। क्योंकि एनओसी को लेकर पुडा व नगर निगम में बड़ा लंबा चौड़ा झंझट था, जिसकी पेचीदा प्रकिया में फंसकर आम नागरिक काफी परेशानी का सामना कर रहे थे। 
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लंबे समय से पोर्टल भी कभी खराब हो जाता था तो कभी सर्वर डाउन हो जाता था। कई बार फाइलें ऑटो जंप हो जाती थी। लिहाजा, आम लोग कार्यालयों के चक्कर काटकर थक जाते थे।

यह प्रकिया थी एनओसी की
1- सबसे पहले आवेदनकर्ता को नगर निगम से अधिकृत आर्किटेक्ट के पास जाना पड़ता था। जो एनओसी अपलोड करने के लिए 5 हजार रुपये फीस की मांग करता था।
2- इसके बाद खरीददार से दस्तावेज लिए जाते थे और अगर जमीन का एग्रीमेंट 2018 से पहले का है तो ही एनओसी के लिए आवेदनकर्ता की तरफ से आवेदन मंजूर किया जाता था।
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3- प्लाट की गूगल मैप की लोकेशन भी अपलोड करनी पड़ती है। इसके अलावा साइट प्लान भी तैयार कर लगाया जाता है।
4- आर्किटेक्ट से आवेदन करने के बाद ऑनलाइन फाइल इलाके के ड्राफ्टमैन के पास चली जाती है, जो मौके पर जाकर प्लाट को वेरिफाई करता है और तस्वीरों को अपलोड करता है।
5- इसके साथ ही प्लाट को एनओसी देने के लिए कितना सरकारी फीस अदा करनी होगी, इसका विवरण तैयार होता है।
6- फाइल आगे इलाके के इंस्पेक्टर या एसडीओ के पास जाती है जो दोबारा पूरा विवरण चेक करता है और अपनी रिपोर्ट देता है।
7-फाइल आगे इलाके के एटीपी या एक्सईएन के पास चली जाती है, जो दोबारा सारे दस्तावेजों को चेक करता है।
8- बाद में फाइल एमटीपी के पास जाती है तो फाइल को एप्रूव करता है, अगर कुछ खामी है तो वह इसको वापस भेज सकता है, जो सीधा आर्किटेक्ट के पास वापस जाती है और दोबारा ड्राफ्टमैन से लेकर एटीपी तक पहुंचती है।
9- अगर फाइल स्वीकृत हो जाती है तो ऑनलाइन पैसे के लिए लिंक जेनरेट होता है, जिसको क्लिक करने के बाद डेबिट कार्ड से इसकी फीस अदा की जाती है।
10- फीस अदा करने के बाद फाइल एटीपी या एमटीपी के पास वापस जाती है जो डिजिटल साइन करता है और एनओसी अपलोड हो जाती है।

यह आ रही थी दिक्कतें...
1- भारी संख्या में लोगों के पास ऑनलाइन सुविधा नहीं है, वह आर्किटेक्ट के पास या निगम या पुडा कार्यालय में चक्कर लगाते थक जाते थे।
2- नगर निगम का पोर्टल कई बार 15-15 दिन बंद रहता है।
3- कई बार फाइलें ऑटो जंप हो जाती हैं तो दोबारा अपलोड करनी पड़ती थी।
4- कई बार फाइलें करप्ट हो जाती थी, जिस कारण परेशानी आती थी।
5- एटीपी से लेकर ड्राफ्टमैन के पास न तो लैपटॉप है और न ही कंप्यूटर, मोबाइल पर सारा काम करना पड़ रहा था।
6- अधिकारी या मुलाजिम का तबादला होने पर फाइलें कई कई दिन अटकी रहती थी। क्योंकि जो अधिकारी इलाके में तैनात है वह ही मोबाइल पर ओटीपी आने के बाद साइट को खोल सकता था।

अब मिलेगी राहत
विधायक रमन अरोड़ा का कहना है कि मान सरकार का यह एक सराहनीय फैसला है, जो मध्यमवर्गीय व गरीब लोगों के लिए काफी फायदेमंद है। ज्यादातर गरीब लोग आर्किटेक्ट से लेकर कार्यालयों के चक्कर से परेशान हो रहे थे। यह पिछली सरकार के पेचीदा फैसले थे, जिन पर मान सरकार ने आम जनता को राहत दी है।

सरकार का फैसला अच्छा, एनआरआईज को राहत मिलेगी
विक्टोरिना गार्डन विला के मालिक राजू ढींगरा का कहना है कि मान सरकार का कदम काबिले तारीफ है। आम जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए। एनओसी की प्रकिया पेचीदा होने के कारण लोग परेशान हो रहे थे। यह फैसला भी अच्छा है कि आगे से किसी को नाजायज कालोनी नहीं काटने दी जाएगी। इससे एनआरआईज को फायदा भी मिलेगा जो एनओसी के इंतजार में लंबा वक्त आस लगाकर पंजाब में बैठे रहते थे क्योंकि प्रकिया लंबी व पेचिदा थी।
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