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Punjab: पंजाब विजिलेंस आयोग भंग करने के विधेयक को राज्यपाल ने दी मंजूरी, एक साल से था लंबित

Thu, 21 Dec 2023 09:55 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पहली बार राज्य में विजिलेंस आयोग की स्थापना अक्तूबर 2006 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने की थी, जिसे बाद में प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार ने मार्च 2007 में भंग कर दिया। नवंबर 2020 में कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने इसका फिर से गठन किया।
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बनवारी लाल पुरोहित - फोटो : फाइल फोटो।
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विस्तार
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पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने एक साल से लंबित पंजाब स्टेट विजिलेंस आयोग निरसन विधेयक-2022 को मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार ने इस विधेयक को विधानसभा में पारित करने के बाद 1 अक्तूबर, 2022 को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा था। खास बात यह भी है कि पंजाब में यह आयोग दूसरी बार भंग किया गया है।
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विधानसभा में इस विधेयक को पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि आयोग का मुख्य कार्य भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 के तहत लोक सेवकों के खिलाफ शिकायतों की जांच करना या जांच शुरू करना है। परंतु यह आयोग राज्य के खजाने पर बोझ बनने के अलावा किसी भी उपयोगी उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहा है। 

भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए राज्य में राज्य सतर्कता विभाग सहित कई एजेंसियां हैं। इस वजह से ओवरलैपिंग, विरोधाभासी निष्कर्षों, परिणाम में देरी और संचारहीनता से बचने के लिए पंजाब राज्य सतर्कता आयोग अधिनियम 2020 (2020 का पंजाब अधिनियम संख्या 20) को निरस्त करना आवश्यक हो गया है। राज्य में इस आयोग का गठन कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने किया था।
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जस्टिस (रिटायर्ड) मेहताब सिंह गिल को इस आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। राज्यपाल ने भगवंत मान सरकार द्वारा भेजे गए उक्त विधेयक को पहले यह कहते हुए मंजूरी नहीं दी कि यह एक वित्त विधेयक है और सरकार ने इसे सदन में पेश करने के लिए उनसे पूर्व अनुमति नहीं ली थी।

गत नवंबर माह में राज्य सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्यपाल को दिए निर्देशों के बाद, तीन विधेयकों- पंजाब विश्वविद्यालय कानून (संशोधन) विधेयक 2023, सिख गुरुद्वारा (संशोधन) विधेयक 2023 और पंजाब पुलिस (संशोधन) विधेयक 2023 को तो राष्ट्रपति के पास भेज दिया है और उक्त चौथे विधेयक को मंजूरी दे दी है।

पहली बार राज्य में विजिलेंस आयोग की स्थापना अक्तूबर 2006 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने की थी, जिसे बाद में प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार ने मार्च 2007 में भंग कर दिया। नवंबर 2020 में कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने इसका फिर से गठन किया। अब राज्यपाल द्वारा आयोग भंग करने पर अपनी सहमति दिए जाने के बाद अब इसके चेयरमैन पद और आयोग के कार्यालय का अस्तित्व समाप्त हो गया है।
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