हरियाणा न्यायिक शाखा के अधिकारियों ने हरियाणा में एडिशनल सेशन जज के 13 पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी इसे अधिसूचित नहीं करने को चुनौती दी थी। इस मामले में हाईकोर्ट की ओर से पेश हुए वकील ने बेंच के समक्ष 12 सितंबर को हरियाणा सरकार की ओर से रजिस्ट्रार जनरल को भेजा पत्र सौंपा था।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पद पर सिविल सेवा की न्यायिक शाखा के अधिकारियों की पदोन्नति में अड़चन डालने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार पर प्रति याचिकाकर्ता 50,000 रुपये जुर्माना लगाया है।
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इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं के पदोन्नति आदेश दो सप्ताह में जारी करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने करीब 3 माह सुनवाई के बाद 5 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा न्यायिक शाखा के अधिकारियों ने हरियाणा में एडिशनल सेशन जज के 13 पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी इसे अधिसूचित नहीं करने को चुनौती दी थी। इस मामले में हाईकोर्ट की ओर से पेश हुए वकील ने बेंच के समक्ष 12 सितंबर को हरियाणा सरकार की ओर से रजिस्ट्रार जनरल को भेजा पत्र सौंपा था। इस पत्र की भाषा पर हाईकोर्ट ने आपत्ति जताई थी।
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पत्र में कहा गया था कि हाईकोर्ट ने पदोन्नति निर्णय से पहले सरकार से परामर्श नहीं किया। बिना परामर्श पदोन्नति सिफारिश को लेकर सरकार ने केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय से कानूनी राय मांगी थी। इस राय के बाद ही अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश (एडीएसजे) के पद पर 13 हरियाणा सिविल सेवा (न्यायिक शाखा) के अधिकारियों की पदोन्नति के लिए सिफारिशों को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया गया था।
पदोन्नति के लिए सरकार को नाम भेजते समय संविधान के अनुच्छेद 309 के साथ हरियाणा सुपीरियर न्यायिक सेवा नियम 2007 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके बाद हाईकोर्ट ने पत्र लिखने वाली संयुक्त सचिव को तलब कर लिया था।
सरकार और हाईकोर्ट प्रशासनिक स्तर पर थे आमने सामने
कोर्ट ने कहा था कि ऐसा लगता है कि सरकार किसी और के लिए यह केस लड़ रही है। ऐसा कौन चहेता है जो इस पदोन्नति की प्रक्रिया में हमसे छूट गया। इस पत्र को लेकर हरियाणा सरकार व हाईकोर्ट आमने सामने हो गए थे। इसके बाद लगातार रोजाना आधार पर केस की सुनवाई हुई और हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब हाईकोर्ट ने न्यायिक शाखा अधिकारियों की याचिका मंजूर कर ली है और उन्हें पदोन्नत करने का आदेश दिया है। हालांकि इस मामले में विस्तृत फैसला आना अभी बाकी है।