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नीट/जेईई परीक्षा मामले में सुप्रीम कोर्ट जाएगी पंजाब सरकार, कैप्टन ने रिव्यू पिटीशन दायर करने को कहा

Wed, 26 Aug 2020 10:15 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • सोनिया गांधी से वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान लिया फैसला
  • जीएसटी मुआवजे पर एकजुट होंगे कांग्रेस शासित राज्य
  • मुख्यमंत्री बोले- अब पीएम से मिलने का समय लेने का समय नहीं 
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कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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कोविड संकट के बीच नीट/जेईई परीक्षा में कुछ ही दिन बाकी हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को राज्य के एडवोकेट जनरल (एजी) अतुल नंदा को निर्देश दिए कि विपक्षी पार्टियों  के शासन वाले अन्य राज्यों में अपने समकक्ष अधिकारियों से तालमेल कर सुप्रीम कोर्ट में एक सामूहिक रिव्यू पिटीशन दायर कर परीक्षाओं को आगे बढ़ाने की गुजारिश की जाए।

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यह दिशा-निर्देश कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ विपक्षी दलों के शासन वाले सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक के बाद दिए गए। जिसमें नीट/जेईई परीक्षाओं के अलावा अन्य साझे हितों के मुद्दों पर विचार किया गया। इनमें जीएसटी मुआवजे के जारी होने में देरी, केंद्र सरकार के कृषि अध्यादेश और नई शिक्षा नीति शामिल है। कैप्टन ने कहा कि यह नीति राज्यों के साथ विचार-विमर्श किए बिना उन पर थोपी गई है।
 
कैप्टन ने नीट/जेईई परीक्षा के संबंध में दिए गए एक सुझाव के जवाब में कहा कि इस मुद्दे पर बातचीत करने के लिए प्रधानमंत्री से समय लेने का समय अब नहीं है। सभी को इकट्ठा होकर यह परीक्षा आगे करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए, क्योंकि इन परीक्षाओं के साथ लाखों विद्यार्थियों की जान को खतरा हो सकता है। 

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जान को खतरे में डालने की कोई जरूरत नहीं

समूची दुनिया में परीक्षाएं ऑनलाइन ली जा रही हैं और यह सुझाव दिया कि नीट/जेईई और अन्य पेशे से जुड़ीं परीक्षाएं जैसे मेडिकल और कानून, ऑनलाइन ढंग से करवाई जा सकती हैं। विद्यार्थियों की जान को खतरे में डालने की कोई जरूरत नहीं है। कैप्टन ने मीटिंग में बताया कि कॉलेजों/विश्वविद्यालयों के लिए लाजिमी अंतिम वर्ष की परीक्षा के मुद्दे पर बार-बार दलीलों और याद दिलाने के बावजूद यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) उनकी सरकार की चिंताओं पर ध्यान देने में नाकाम है। 

‘नई शिक्षा नीति के मूल्यांकन के लिए पंजाब बनाएगा कमेटी’
मुख्यमंत्री ने यह भी खुलासा किया कि उनकी सरकार नई शिक्षा नीति के पंजाब की शिक्षा प्रणाली और वित्तीय हालत पर पड़ने वाले प्रभावों का मूल्यांकन करने को एक कमेटी बनाने जा रही है। प्रत्येक राज्य का अपना ही एक राज प्रबंध होता है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एलान करने के समय पर केंद्र सरकार ने ध्यान में नहीं लिया।



 
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वेतन देने को पैसे नहीं, स्कॉलरशिप का भुगतान कैसे करें : कैप्टन

कैप्टन ने केंद्र सरकार द्वारा एससी विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम बंद करने का मुद्दा भी उठाया, जिसकी उनके राज्य में संख्या 3.17 लाख है। उन्होंने कहा कि गरीब एससी विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप बंद करने का केंद्र सरकार को कोई हक नहीं था, बल्कि वह तो चाहते थे कि उनके राज्य में सभी गरीब विद्यार्थी पढ़े-लिखे हों। राज्य में बड़े वित्तीय संकट के मद्देनजर उनके पास तो वेतन और अन्य मौजूदा वचनबद्धताओं को पूरा करने के लिए राशि नहीं है और वह कैसे आशा कर सकते हैं कि इन स्कॉलरशिपों का भुगतान भी वह करें।

केंद्र जीएसटी का मुआवजा नहीं देगा तो हमसे काम की उम्मीद कैसे करेगा
राज्य को पेश वित्तीय संकट का चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र 31 मार्च, 2020 के बाद जीएसटी मुआवजा जारी करने में असफल रहा है, जोकि 7000 करोड़ रुपये बनता है। इसके न मिलने के कारण कोविड संकट के चलते पंजाब को मुश्किल स्थिति में डाल दिया गया है। कोविड का आंकड़ा राज्य में 44000 पार कर गया है और 1178 मौतें हुई हैं। कैप्टन ने कहा कि अगर केंद्र सरकार हमें हमारा जीएसटी मुआवजा नहीं देती तो वह हमसे कैसे काम करने की उम्मीद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य अपने आप प्रबंधन नहीं कर सकते और केंद्र की सहायता की जरूरत है। 
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