समूची दुनिया में परीक्षाएं ऑनलाइन ली जा रही हैं और यह सुझाव दिया कि नीट/जेईई और अन्य पेशे से जुड़ीं परीक्षाएं जैसे मेडिकल और कानून, ऑनलाइन ढंग से करवाई जा सकती हैं। विद्यार्थियों की जान को खतरे में डालने की कोई जरूरत नहीं है। कैप्टन ने मीटिंग में बताया कि कॉलेजों/विश्वविद्यालयों के लिए लाजिमी अंतिम वर्ष की परीक्षा के मुद्दे पर बार-बार दलीलों और याद दिलाने के बावजूद यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) उनकी सरकार की चिंताओं पर ध्यान देने में नाकाम है।
‘नई शिक्षा नीति के मूल्यांकन के लिए पंजाब बनाएगा कमेटी’
मुख्यमंत्री ने यह भी खुलासा किया कि उनकी सरकार नई शिक्षा नीति के पंजाब की शिक्षा प्रणाली और वित्तीय हालत पर पड़ने वाले प्रभावों का मूल्यांकन करने को एक कमेटी बनाने जा रही है। प्रत्येक राज्य का अपना ही एक राज प्रबंध होता है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एलान करने के समय पर केंद्र सरकार ने ध्यान में नहीं लिया।
कैप्टन ने केंद्र सरकार द्वारा एससी विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम बंद करने का मुद्दा भी उठाया, जिसकी उनके राज्य में संख्या 3.17 लाख है। उन्होंने कहा कि गरीब एससी विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप बंद करने का केंद्र सरकार को कोई हक नहीं था, बल्कि वह तो चाहते थे कि उनके राज्य में सभी गरीब विद्यार्थी पढ़े-लिखे हों। राज्य में बड़े वित्तीय संकट के मद्देनजर उनके पास तो वेतन और अन्य मौजूदा वचनबद्धताओं को पूरा करने के लिए राशि नहीं है और वह कैसे आशा कर सकते हैं कि इन स्कॉलरशिपों का भुगतान भी वह करें।
केंद्र जीएसटी का मुआवजा नहीं देगा तो हमसे काम की उम्मीद कैसे करेगा
राज्य को पेश वित्तीय संकट का चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र 31 मार्च, 2020 के बाद जीएसटी मुआवजा जारी करने में असफल रहा है, जोकि 7000 करोड़ रुपये बनता है। इसके न मिलने के कारण कोविड संकट के चलते पंजाब को मुश्किल स्थिति में डाल दिया गया है। कोविड का आंकड़ा राज्य में 44000 पार कर गया है और 1178 मौतें हुई हैं। कैप्टन ने कहा कि अगर केंद्र सरकार हमें हमारा जीएसटी मुआवजा नहीं देती तो वह हमसे कैसे काम करने की उम्मीद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य अपने आप प्रबंधन नहीं कर सकते और केंद्र की सहायता की जरूरत है।