पीयू के कर्मचारियों को सचिवालय भत्ता पीयू ने पंजाब सरकार के कहने पर बंद कर दिया और अब पीयू खुद पंजाब सरकार से भत्ता दोबारा देने की सिफारिशें करने की बात कर रहा है। यह बात कर्मचारियों को हजम नहीं हो रही है।
उनका कहना है कि पीयू की सिंडिकेट के जरिये बाहर आई बात से साफ है कि उन्हीं केवल मीठी गोली दी जा रही है। कर्मचारियों ने भी अपनी मंशा बता दी है कि वह इसका हल खुद निकालेंगे। चाहे वह हाईकोर्ट जाएं या फिर आंदोलन का रास्ता अपनाएं। अपने अधिकार के लिए वह कुछ भी करने को अब तैयार हैं।
मालूम हो कि पंजाब सरकार ने पीयू से हाल ही में कहा था कि कर्मचारियों को सचिवालय भत्ता दिया जाएगा तो वह पीयू को सालाना दी जाने वाली राशि नहीं देंगे। लगभग 30 करोड़ रुपये पीयू को सालाना अनुदान पंजाब सरकार देती है।
सरकार के कहने के बाद पीयू ने इस भत्ते पर रोक लगा दी और फरवरी के वेतन में यह लगकर नहीं आएगा। यह बात कर्मचारियों को पता चली तो उनमें आक्रोश पनप गया। यह प्रकरण शनिवार को सिंडिकेट की बैठक में उठा तो फिर बात सामने आई कि पीयू सरकार को यह भत्ता दिए जाने की सिफारिश करेगा।
यह बात कर्मचारियों को हजम नहीं हो रही। उनका कहना है कि कर्मचारी पीयू के हैं न कि पंजाब सरकार के। यदि पीयू की मंशा कर्मचारियों के लिए अच्छी होती तो इसे बंद नहीं किया जाता और अब पीयू प्रशासन सिफारिश की बात कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि अब कर्मचारी आर-पार की लड़ाई लड़ने की तैयारी बना रहे हैं।
हाईकोर्ट के जरिये मिल सकती है राहत
कुछ कर्मचारी नेताओं ने बताया कि 2000 कर्मचारियों के वेतन से यह कटौती की जा रही है। साल में लगभग सात करोड़ रुपये कटेंगे। यह रकम कर्मचारियों के लिए अहमियत रखती है। कर्मचारियों के परिवार प्रभावित होंगे। साथ ही उसी वेतन के मुताबिक कर्मचारियों ने अपने खर्चे आदि किए हैं। लॉन भी लिए हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि हाईकोर्ट से राहत मिल सकती है, क्योंकि अचानक किसी के वेतन से कटौती करना ठीक नहीं है। कर्मचारी भी पीयू के अधीन हैं न कि पंजाब सरकार के। कर्मचारियों ने कहा कि फरवरी में आने वाले वेतन से पहले इस पर निर्णय हो सकता है।