कोविड-19 के सामूहिक फैलाव के खतरे और विशेषज्ञों द्वारा इस महामारी का चरम अगले दो महीने बाद आने के संकेतों की आशंका के मद्देनजर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गुरुवार को आदेश जारी किया कि सप्ताह के आखिरी दिनों और सार्वजनिक अवकाश वाले दिनों में सख्ती के साथ केवल ई-पास धारकों को ही आने-जाने की आज्ञा दी जाए।
कोविड की स्थिति का जायजा लेने और इसके फैलाव को रोकने के लिए राज्य की तैयारियों के संबंध में बुलाई गई वीडियो कॉन्फ्रेंस मीटिंग में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मेडिकल स्टाफ और जरूरी सेवाएं मुहैया करवाने वालों को छोड़कर बाकी सभी नागरिकों को सप्ताह के आखिरी दिनों और छुट्टी वाले दिन कहीं भी आने-जाने के लिए कोवा एप से ई-पास डाउनलोड करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों को सभी दिनों में सामान्य रूप से काम करने की इजाजत होगी। डीजीपी दिनकर गुप्ता को आदेश दिया कि बड़े जलसे-समारोहों का आयोजन रोका जाए।
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खतरनाक रूप धारण कर सकती है महामारी: कैप्टन
कैप्टन ने कहा कि सख्त बंदिशें ही महामारी के चरम को जितना संभव हो, टाल सकती हैं। महामारी आने वाले दिनों में खतरनाक रूप धारण सकती है। मुख्यमंत्री ने मेडिकल और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से कहा कि सख्त शर्तें लागू करें और दिल्ली से आने वालों के लिए टेस्ट सर्टिफिकेट को सुनिश्चित किया जाए, क्योंकि वहां की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बैठक में बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से पंजाब में रोजाना औसतन 500 से 800 वाहन आते हैं। मीटिंग के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा करने के बाद दिल्ली से आने वालों पर कड़ी रोक लगाने का फैसला किया गया।
बाहर से आने वालों का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार
बैठक में यह बात सामने आई कि राज्य में बाहर से पहुंचे ज्यादातर व्यक्तियों द्वारा गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया गया और स्वास्थ्य अधिकारियों के पास रिपोर्ट नहीं की गई। वायरस के लक्षण सामने आने में 3-4 दिन लगते हैं, इसलिए राज्य के बाहर के क्षेत्रों से आने वालों का सप्ताह के बाद टेस्ट किया जाए और इसी दौरान उनको सख्ती से अपने घरों में एकांतवास में रहने के लिए कहा जाए। उन्होंने घरों में एकांतवास को सख्ती से लागू करवाने के निर्देश पंजाब पुलिस के प्रमुख को दिए हैं। पंजाब पुलिस प्रमुख द्वारा बताया गया कि इसे लागू करवाने के लिए 550 पुलिस दस्ते काम कर रहे हैं।