पंजाब सरकार ने रेत-बजरी की कीमतों पर नियंत्रण का काम अपने हाथों में ले लिया है। अब प्रदेश में रेत-बजरी खदानों से निकालने से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचाने तक सारा काम पीएसआईईसी और पंजाब मंडी बोर्ड करेंगे।
हालांकि खनन के लिए जिन खड्डों की नीलामी पहले हो चुकी है, वह समयावधि पूरी होने तक जारी रहेंगी। इसके अलावा 37 खदानों से रेत-बजरी निकालने और सप्लाई का काम सरकार ने संभाल लिया है।
यह फैसला मंगलवार को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया। कैबिनेट ने पंजाब माइनर मिनरल रूल्स-2013 में संशोधन को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत उक्त 37 खदानों से निकासी का काम पीएसआईसी को निर्धारित दरों पर अलॉट करने की अनुमति उद्योग विभाग को दे दी गई है।
कैबिनेट ने माइनिंग निदेशक का अलग पद सृजित करने का भी फैसला किया। मंत्रिमंडल ने उद्योग और कृषि विभागों के मंत्रियों को यह नीति लागू करने में आने वाली किसी भी अड़चन को समाप्त करने के लिए अधिकृत किया है।
उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने बताया कि पीएसआईईसी खदानों से रेत-बजरी की निकासी कर इसकी आपूर्ति वाजिब दरों पर लोगों को करेगा। पंजाब मंडी बोर्ड भी रेत-बजरी की सप्लाई खपतकारों को उनके घरों तक या मार्केट कमेटी के यार्ड तक तय ट्रांसपोर्ट दरों पर करवाएगा।
उपभोक्ता मार्केट कमेटी के स्तर पर भी रेत-बजरी की बुकिंग करवा सकेंगे। खदानों से उपभोक्ता तक निर्माण सामग्री पहुंचाने का काम किलोमीटर स्कीम के तहत पांच साल के ठेके पर देने की बात भी सुखबीर बादल ने कही। उन्होंने कहा कि इससे कंपटीशन बढ़ेगा और रेत-बजरी की कीमतें निश्चित रूप से 50 से 60 फीसदी तक कम हो जाएंगी।
केबिनेट ने लिए यह फैसले
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