मुख्तार अंसारी के वकील की फीस नहीं देगी मान सरकार।
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के केस की पंजाब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने वाले वकील की फीस के 55 लाख रुपये देने से इन्कार कर दिया है। इस वकील को कैप्टन सरकार के समय में नियुक्त किया गया था। वह एक पेशी के 11 लाख रुपये लेते थे। इसका भुगतान पंजाब सरकार को करना है। मोहाली के एक बिल्डर से रंगदारी मांगने के मामले में अंसारी जनवरी 2019 से लेकर अप्रैल 2021 तक रूप नगर जेल में बंद था।
मुख्यमंत्री मान ने गुरुवार को राज्य की पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपी के एक अपराधी को रोपड़ जेल में सुविधाओं के साथ रखा गया था। उसे 48 बार वारंट जारी करने के बावजूद पेश नहीं किया गया। बचाव के लिए महंगे वकील को नियुक्त किया गया। वकील का खर्च 55 लाख रुपये आया।
खर्चे की इस फाइल को मैंने लौटा दिया है। इस व्यय को उन तत्कालीन मंत्रियों से वसूलने के बारे में सोच रहा हूं जिनके आदेश पर यह निर्णय लिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि करदाताओं के पैसे की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मान ने कहा कि इस घृणित जुर्म में शामिल हर व्यक्ति को इस गुनाह के लिए जवाबदेह बनाया जाएगा।
यूपी पुलिस सुप्रीम कोर्ट पहुंची, तब मिली हिरासत
यूपी में मुख्तार के खिलाफ कई केस दर्ज हैं। यूपी पुलिस अंसारी की हिरासत लेना चाहती थी लेकिन पंजाब सरकार गैंगस्टर का मेडिकल ग्राउंड दिखाकर उसे सौंपने से इन्कार कर देती थी। आखिर में यूपी पुलिस सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को अंसारी की हिरासत को सौंपने का निर्देश दिया था।