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इस बार फीकी रहेगी पंजाब के किसानों, कर्मचारियों की दशहरा-दिवाली, जानिए क्यों?

Fri, 29 Sep 2017 09:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Punjab News - फोटो : File Photo
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इस बार पंजाब में किसानों और कर्मचारियों का दशहरा और दिवाली फीकी ही रहेगी। इसका कारण है कि न किसानों की कर्ज माफी की अधिसूचना को मंजूरी मिलने की उम्मीद है और न कर्मचारियों को डीए की लंबित किस्त मिलने की। 
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पंजाब सरकार ने बुधवार को किसानों की कर्ज माफी संबंधी नोटिफिकेशन को अनुमति के लिए चुनाव आयोग के पास भेज दिया। गुरदासपुर उपचुनाव के कारण राज्य सरकार के लिए इस नोटिफिकेशन को लागू करने के लिए चुनाव आयोग की मंजूरी जरूरी है। हालांकि, आचार संहिता के कारण इस पर अनुमति मिलने की उम्मीद कम ही है, ऐसे में किसानों की कर्ज माफी उपचुनाव सम्पन्न होने तक अटकी रहेगी।

दूसरी ओर, प्रदेश सरकार का खजाना खाली होने और केंद्र सरकार से सूबे के हिस्से के करों का पैसा भी अदा नहीं किए जाने के कारण सरकारी कर्मचारियों को डीए की लंबित किस्त का भुगतान नहीं हो सकेगा। यानी, दशहरे और दिवाली के त्यौहार के मौके पर सूबे के किसानों और कर्मचारियों के लिए कोई अच्छी खबर नहीं है। कर्मचारियों के लिए बस इतनी राहत है कि मुख्यमंत्री यह एलान कर चुके हैं कि कर्मचारियों को इस माह समय पर वेतन मिल जाएगा।
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दरअसल, पंजाब सरकार वित्तीय संकट से किसी भी तरह उबर नहीं पा रही। केंद्र सरकार से जीएसटी में राज्य के हिस्से का फंड भी समय पर जारी नहीं किया जा रहा और राज्य सरकार अपने संसाधनों से भी पर्याप्त पैसा नहीं जुटा पा रही। जीएसटी के कारण राज्य सरकार कोई नया टैक्स भी नहीं लगा सकती। इसके अलावा पंजाब सरकार की ओर से केंद्र से सीसीएल के तहत भारी भरकम कर्ज माफ करने और प्रदेश सरकार की बाजार से कर्ज उठाने की लिमिट बढ़ाने से इनकार कर दिए जाने से भी कैप्टन सरकार की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं।

हाल ही में कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने किसानों के दो लाख के कर्ज माफी संबंधी नोटिफिकेशन तो जारी कर दिया, लेकिन इस कर्ज के एवज में कर्जदाता बैंकों को देने के लिए पैसे की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। सरकारी खजाने के मौजूदा हालात यह हैं कि 5000 करोड़ के बिल खजाने में अटके हैं और सरकार ओवर ड्राफ्ट में फंस गई है। इसी बीच, राज्य सरकार को पिछले कर्जों के एवज में 30 सितंबर को ब्याज के 750 करोड़ रुपये भी चुकाने हैं। इसलिए राज्य सरकार ने अब केंद्र पर दबाव बढ़ा दिया है कि उसे बाजार से कर्ज उठाने की अनुमति मिल जाए।

सूत्रों के अनुसार, सरकार कोशिश कर रही है कि उसे 1000 करोड़ में से 600 करोड़ रुपये ही मिल जाएं ताकि अक्तूबर माह का काम चल जाए। यही कारण भी है कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की किश्त नहीं दे रही। इस बीच, धान खरीद का मौसम भी शुरू हो रहा है, जिसके लिए 31000 करोड़ रुपये की लिमिट भी हासिल करनी है ताकि सरकार मंडियों से धान उठा सके। इसके लिए राज्य सरकार प्रयास यह कर रही है कि पिछले सीजन का बकाया 600 करोड़ रुपये आरबीआई को चुकता कर दिया जाए ताकि अगली लिमिट के लिए पैसे की व्यवस्था हो सके। 
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