पंजाब मंत्रिमंडल ने पटियाला में बनने वाली खेल यूनिवर्सिटी को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के दादाश्री महाराजा भुपिंदर सिंह का नाम देने का फैसला किया है। हालांकि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस पर सहमति नहीं दी, लेकिन खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने अपनी सहमति की मुहर लगा दी। इस फैसले के साथ ही पटियाला शाही घराने और महाराजा भूपिंदर सिंह के खेलों में दिया गया योगदान इतिहास के पन्नों से निकलकर सुर्खियों में आ गया।
बुधवार को सोशल मीडिया और अनेक न्यूज पोर्टलों ने महाराजा भूपिंदर सिंह द्वारा क्रिकेट, पोलो, निशानेबाजी आदि खेलों को लेकर किए गए कार्यों का उल्लेख किया। 1928-1938 तक भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष रहे महाराजा भूपिंदर सिंह 1911 में पहली भारतीय क्रिकेट टीम की तरफ से इंग्लैंड दौरे पर गए थे। उन्होंने क्रिकेट टीम की कप्तानी भी की। महाराजा ने मशहूर मेरिलेबॉन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) की टीम की तरफ से क्रिकेट भी खेला। उनके खाते में भारतीय घरेलू क्रिकेट रणजी ट्रॉफी सीरीज शुरू करने का भी श्रेय है।
भारत में क्रिकेट के प्रसार की नींव पटियाला शाही घराने द्वारा ही रखी गई थी। हिमाचल प्रदेश के चायल में विश्व की सबसे ऊंचाई पर स्थित क्रिकेट पिच का निर्माण महाराजा भूपिंदर सिंह के पिता महाराजा राजेंद्र सिंह ने कराया, जिस पर महाराजा भूपिंदर सिंह ने अपने कार्यकाल में क्रिकेट के अनेक मैचों का आयोजन कर इस खेल को आगे बढ़ाया। पटियाला में बना पोलो मैदान भी महाराजा भूपिंदर सिंह की पोलो खेल के प्रति रुचि की एक मिसाल है। उस जमाने में पटियाला रियासत के पास विश्व की नंबर एक पोलो टीम हुआ करती थी।
इसके अलावा पटियाला में शूटिंग रेंज की स्थापना भी महाराजा भूपिंदर सिंह के शासनकाल में ही हुई।