कोविड संकट से निपटने के लिए पंजाब कैबिनेट ने मंगलवार को तत्काल आधार पर मेडिकल अफसरों (स्पेशलिस्ट) के 428 रेगुलर पदों को भरने की मंजूरी दे दी। इसके साथ ही पहले से भरे जा चुके छह स्पेशलटियों के 107 पदों की कार्य बाद मंजूरी पर भी कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कैबिनेट मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए कहा कि चूंकि कोविड चरम की तरफ बढ़ रहा है।
इससे निपटने के लिए स्टाफ की बहुत जरूरत थी। पिछली समीक्षा के दौरान कैप्टन ने खाली पदों की पहचान करके तुरंत भरे जाने की जरूरत पर जोर दिया था। कैबिनेट की मीटिंग के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में यह भर्ती डॉ. केके तलवार की अध्यक्षता वाली विशेष चयन कमेटी की तरफ से वॉक-इन-इंटरव्यू द्वारा की जाएगी।
प्रवक्ता ने बताया कि जिन पदों के लिए कार्य बाद परवानगी दी गई है, वह 323 मेडिकल अफसरों (स्पेशलिस्ट) की चल रही भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा हैं। कैबिनेट की तरफ से डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए आरक्षित श्रेणियों के पदों को मेडिकल अफसर (जनरल) के मुकाबले एडजस्ट /आगे ले जाया जाएगा।
नए 428 पदों में से 136 जिला अस्पताल स्तर पर स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें 22 पद बच्चों के विशेषज्ञ, फोरेंसिक मेडिसन और गायनी के लिए 20 -20 पद और माइक्रोबायोलॉजी के लिए 18 पद शामिल हैं। सब-डिविजनल अस्पतालों के स्तर पर मंजूर किए 190 पदों में से सबसे अधिक 39 -39 पद मेडिसन और गायनी के हैं जबकि 30 पद चमड़ी रोगों, 29 पद ईएनटी और 13 पद ऐनेसथीसिया के लिए हैं। कम्युनिटी सेहत केंद्रों के स्तर पर एनेसथीसिया के 102 पद मंजूर किये गये हैं। प्रवक्ता के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जरूरत पड़ने पर और पद सृजित करने के अलावा यह पद जल्द से जल्द भरे जाएंगे।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग ने 30 जून, 2020 को कैबिनेट से मेडिकल और पैरा-मेडिकल स्टाफ के 3954 पद भरने की मंजूरी ली थी। इसलिए भर्ती प्रक्रिया पहले ही चल रही है। 13 विभिन्न विशेषज्ञ मेडिकल अफसरों के 323 पदों के लिए चयन प्रक्रिया भी चल रही है और सफल उम्मीदवारों को नियुक्ति सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं। इन 323 पदों में से सिर्फ 34 जनरल श्रेणी से संबंधित हैं और बाकी विभिन्न आरक्षित श्रेणियों में से हैं। भर्ती के लिए ऊपरी आयु सीमा में पहले ही सरकारी सेवा निभा रहे व्यक्तियों के संबंध में 45 साल तक छूट दी गई है।
11 और यूनिवर्सिटी कॉलेजों को 1.5 करोड़ वार्षिक आवर्ती अनुदान
पंजाब मंत्रिमंडल ने मंगलवार को राज्य के 11 और यूनिवर्सिटी (कॉन्स्टीटूएंट) कॉलेजों को 2016-17 से 2020-21 के लिए 1.5 करोड़ रुपये प्रति कॉलेज प्रति वर्ष के हिसाब से कुल 75.75 करोड़ का आवर्ती (रिकरिंग) अनुदान मंजूर किया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कैबिनेट ने भविष्य में इन कॉलेजों के लिए प्रति कॉलेज प्रति वर्ष के लिए 1.5 करोड़ का नियमित बजट उपबंध करने की भी मंजूरी दे दी।
इसके साथ ही राज्य में ऐसे कॉलेजों की संख्या 30 हो गई, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा आवर्ती अनुदान दिया जा रहा है। इन कॉलेजों में पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के तीन कॉलेज- यूनिवर्सिटी कॉलेज धुरी (संगरूर), यूनिवर्सिटी कॉलेज बहादुरपुर (मानसा) और यूनिवर्सिटी कॉलेज बरनाला, गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी कॉलेज अमृतसर के छह कॉलेज- यूनिवर्सिटी कॉलेज पठानकोट, यूनिवर्सिटी कॉलेज सुजानपुर, बाबा नामदेव यूनिवर्सिटी डिग्री कॉलेज किशनकोट (गुरदासपुर), यूनिवर्सिटी कॉलेज फिल्लौर (जालंधर), यूनिवर्सिटी कॉलेज नकोदर (जालंधर) और यूनिवर्सिटी कॉलेज कलानौर (गुरदासपुर) के साथ ही पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के दो कॉलेज- यूनिवर्सिटी कॉलेज फिरोजपुर और यूनिवर्सिटी कॉलेज धर्मकोट (मोगा) शामिल हैं। यह अनुदान कॉलेजों के अध्यापकों को समय पर वेतन यकीनी बनाने के अलावा विद्यार्थियों को मानक शिक्षा मुहैया करवाने में सहायक सिद्ध होगा।
मंत्रिमंडल द्वारा एक अन्य फैसले में सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के साल 2018-19 की सालाना प्रशासनिक रिपोर्ट को मंदूरी दी गई।
विभाग द्वारा इस समय के दौरान सभी सामाजिक सुरक्षा स्कीमों को सफलतापूर्वक लागू किया गया, जिनमें बुढ़ापा पेंशन, विधवा और निराश्रित महिलाओं, आश्रित बच्चों और दिव्यांग व्यक्तियों एवं तेजाब पीड़ितों को वित्तीय सहायता, महिलाओं के सशक्तीकरण से संबंधित स्कीम, महिलाओं के विरुद्ध अत्याचार और अपराध रोकने संबंधी एक्ट लागू करना, संगठित बाल विकास स्कीम, संगठित बाल सुरक्षा स्कीम, दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तीकरण से संबंधित स्कीमों और संबंधित एक्ट को लागू करना और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण संबंधी स्कीम शामिल हैं।
साल 2018-19 के दौरान राजस्व के लिहाज से 255981.81 लाख रुपये और पूंजी के लिहाज से 261.50 लाख रुपये बजट उपबंध था, जिसमें से राजस्व पक्ष से 240969.63 लाख रुपये और कैपिटल पक्ष पर 58.50 लाख रुपये खर्च हुए हैं।