सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए हलफनामे में कैप्टन सरकार द्वारा कहा गया है कि गुरुद्वारा साहिब के मामले में संसद नहीं बल्कि विभिन्न राज्यों को अपने-अपने राज्यों के लिए कानून बनाने और उनमें संशोधन करने का अधिकार है। पंजाब के गृह मामले व न्याय विभाग के सचिव राहुल भंडारी द्वारा हाल ही में सरकार की तरफ से दायर किए गए हलफनामे में कहा गया है कि सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 सांविधानिक कानून बनने से पहले का एक्ट है। ऐसे में इस संबंध में किसी भी तरह का संशोधन करने का अधिकार संबंधित राज्य सरकार का कानूनी अधिकार है।
हरियाणा ने सुप्रीम कोर्ट में यह दी दलील
हरियाणा ने सुप्रीम कोर्ट में, अलग कमेटी के पक्ष में दलील रखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा 2011 में सहजधारी सिख फेडरेशन बनाम भारत सरकार मामले में सुनाए गए फैसले का हवाला दिया है। इसमें हाईकोर्ट ने कहा था कि 1925 के एक्ट के तहत केंद्र सरकार के पास शिरोमणि कमेटी के कामकाज के बारे में निर्देश जारी करने की सीमित शक्ति है और केंद्र सरकार इस कानून में कोई भी संशोधन का अधिकार नहीं रखती। साथ ही, केंद्र की कोई भी हिदायत सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 के कानून स्वरूप में परिवर्तन नहीं ला सकती।
एचएसजीपीसी के गठन को सही बताने पर भड़की एसजीपीसी
सिख गुरुद्वारा एक्ट को लेकर पंजाब सरकार और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के बीच टकराव के आसार पैदा हो गए हैं। पंजाब सरकार द्वारा एसजीपीसी की शक्ति को कम करने के लिए हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के गठन को एक सही कदम बताया गया है। एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल के अनुसार हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के गठन का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।
जब हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के गठन का मामला सिर उठा रहा था, तब एसजीपीसी व शिरोमणि अकाली दल ने इसका घोर विरोध किया था। अब पंजाब सरकार सिखों की इस महान संस्था को एक बार फिर तोड़ने के प्रयास में जुट गई है।
लौंगोवाल ने कहा कि एसजीपीसी को तोड़ने की रची जा रही साजिशों से यह साबित हो गया है कि कांग्रेस सिख विरोधी है। कैप्टन सरकार सिख मामलों को जानबूझ कर उलझाना चाहती है। पंजाब सरकार को सिखों के धार्मिक मामलों में दखल देने की आज्ञा नहीं दी जा सकती। कैप्टन सरकार को इस बात का पता होना चाहिए कि एसजीपीसी का गठन महान कुर्बानियों के बाद हुआ है।
एसजीपीसी खुदमुख्त्यार संस्था है जिसका संचालन गुरुद्वारा एक्ट-1925 के आधार पर होता है। एसजीपीसी के चुनाव प्रतिक्रिया व अन्य किसी संशोधन का अधिकार भारत सरकार के पास है। कैप्टन सरकार एसजीपीसी के मामले में अपने दायरे में रहे। लौंगोवाल ने सीएम को नसीहत दी कि वह अपनी सरकार की सांविधानिक सीमाओं में रह कर प्रदेश की जनता के कल्याण की तरफ ध्यान दे। सिख शक्ति को कमजोर करने की साजिश न रचें।
एसजीपीसी को तोड़ने का हलफनामा देना गलत : डॉ. चीमा
पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि जब से देश आजाद हुआ तभी से कांग्रेस की कोशिश रही है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को तोड़ा जा सके या इस पर कब्जा किया जा सके। हमेशा ही खालसा पंथ ने इनका विरोध किया। उन्होंने कहा कि अब कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हलफनामा दायर कर हरियाणा को अलग कमेटी बनाने की बात कही है। एसजीपीसी के चुनाव की रोजाना बातें करने वाले दूसरे ग्रुप क्या अब इस हलफनामे के बारे में बोलेंगे। उन्होंने इस हलफनामे की निंदा करते हुए कहा कि यह एसजीपीसी को तोड़ने की पुरानी साजिश का ही हिस्सा है।
चीमा ने कहा कि एसजीपीसी की बॉडी को राष्ट्रीय स्तर पर अहमियत देने के लिए 170 सदस्य चुनाव प्रक्रिया के जरिए चुने जाने के बाद 15 सदस्य सारे देश से चुने जाते हैं। एसजीपीसी को इंटर स्टेट बॉडी कारपोरेट घोषित किया गया है। इसके लिए इसके एक्ट में केंद्र सरकार ही संशोधन कर सकती है, राज्य इसमें छेड़छाड़ नहीं कर सकता।