लोकसभा चुनाव-2024 के लिए पंजाब राज्य में भी सियासी दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। आमतौर पर चुनाव में पूरे देश के रुझान से अलग प्रदर्शन करने वाले इस राज्य में 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 13 में से 8 सीटें जीती थीं।
उस समय पूरे देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की लहर से ये बिल्कुल विपरीत परिणाम थे। भाजपा ने 282 सीटें जीतकर देशभर में ऐतिहासिक जनादेश दर्ज किया था। वहीं 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब में आंधी चली और कुल 117 सीटों में से 92 सीटें जीतकर आप ने सरकार बनाई।
पंजाब में 2019 के चुनाव परिणामों पर नजर डाली जाए तो शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भाजपा ने 25 साल से चले आ रहे गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। शिअद ने 10 सीटों पर चुनाव लड़कर 2 और भाजपा ने 3 सीटों पर चुनाव लड़कर 2 सीटें जीती थीं। इस गठबंधन को प्रदेश की जनता ने बरगाड़ी व बहबल कलां बेअदबी व गोलीकांड ने तगड़ा झटका दिया था।
दूसरी तरफ, आप जोकि 2017 के विधानसभा चुनाव में मुख्य विपक्षी दल बनकर आत्मविश्वास से भर गई थी, को 2019 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में केवल एक संगरुर सीट ही मिली, जिस पर मौजूदा मुख्यमंत्री भगवंत मान विजयी हुए थे। बीते लोकसभा चुनाव के बाद अब तक राज्य में दो सीटें खाली हुईं, जिनमें संगरूर सीट 23 जून, 2022 को भगवंत मान के इस्तीफा देने से खाली हुई जबकि जालंधर सीट 10 मई, 2023 को कांग्रेस सांसद संतोख सिंह चौधरी की मृत्यु के कारण खाली हुई। इन सीटों पर उपचुनाव में आप से अकाली दल (अमृतसर) के सिमरनजीत सिंह मान संगरूर सीट छीन ली जबकि जालंधर सीट पर आप के सुशील कुमार रिंकू विजयी रहे।
पंजाब की 13 सीटों पर 2019 के लोकसभा चुनाव की एक विशेषता यह रही कि यह तीन सियासी धड़ों के रूप में लड़ा गया। कांग्रेस जहां संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के तहत अकेले मैदान में उतरी, ने 8 सीटें जीतते हुए कुल 40.12 फीसदी वोट हासिल किए। वहीं शिअद और भाजपा जोकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के रूप में मैदान में एक-साथ उतरे, ने कुल 37.08 फीसदी वोट तो हासिल किए लेकिन सीटें केवल 4 ही जीत सके। निजी तौर पर शिअद को 10 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए कुल 27.76 फीसदी और भाजपा को 3 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए कुल 9.63 फीसदी वोट ही मिले।
आप को एकमात्र जीत के साथ कुल 7.38 फीसदी वोट ही मिले। पंजाब में तीसरा धड़ा- पंजाब डेमोक्रेटिक एलायंस का रहा, जिसके तहत लोक इंसाफ पार्टी ने 3 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए 3.43 फीसदी, बसपा ने भी 3 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए 3.52 फीसदी, सुखपाल सिंह खैरा की पंजाब एकता पार्टी ने 3 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए 2.16 फीसदी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने 2 सीटों पर 0.30 फीसदी, क्रांतिकारी मार्क्सवादी पार्टी ने एक सीट पर 0.11 फीसदी, नवां पंजाब पार्टी ने 1 सीट पर 1.17 फीसदी और शिअद (अमृतसर) ने 2 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए 0.4 फीसदी वोट हासिल किए। इस एलायंस ने कुल 11.09 फीसदी वोट हासिल किए लेकिन इनके हिस्से में एक भी सीट नहीं आई।
2019 में विजयी प्रत्याशियों को मिले कुल वोट
निर्वाचन क्षेत्र विजेता पार्टी वोट प्रतिशत
अमृतसर गुरजीत सिंह औजला कांग्रेस 51.78
आनंदपुर साहिब मनीष तिवारी कांग्रेस 39.57
बठिंडा हरसिमरत कौर बादल शिअद 41.04
फरीदकोट मोहम्मद सादिक कांग्रेस 42.98
फतेहगढ़ साहिब अमर सिंह कांग्रेस 41.75
फिरोजपुर सुखबीर सिंह बादल शिअद 54.05
गुरदासपुर सनी देयोल भाजपा 50.61
होशियारपुर सोम प्रकाश भाजपा 42.52
जालंधर संतोख सिंह चौधरी कांग्रेस 37.85
खडूर साहब जसबीर सिंह गिल (डिंपा) कांग्रेस 43.95
लुधियाना रवनीत सिंह बिट्टू कांग्रेस 36.66
पटियाला परनीत कौर कांग्रेस 45.17
संगरूर भगवंत मान आप 37.4
2019 के चुनाव में पंजाब में यह भी रहा विशेष
पंजाब में सबसे बड़ी जीत शिअद के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने फिरोजपुर सीट पर दर्ज की। यहां उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के शेर सिंह घुबाया को 1 लाख 98 हजार 850 वोटों के अंतर से हराया। दूसरी बड़ी जीत पटियाला सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी परनीत कौर ने हासिल की, जिन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी शिअद के सुरजीत सिंह रखड़ा को 1 लाख 62 हजार, 718 वोटों के अंतर से हराया। इन चुनावों में बठिंडा सीट से शिअद की हरसिमरत कौर बादल ने जीत की हैट्रिक बनाई। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के मौजूदा प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को 21,772 वोटों के अंतर से हराया। गुरदासपुर सीट पर भाजपा ने फिल्म अभिनेता सनी देयोल को उतारा था। यह सनी देयोल के सियासी कैरियर की शुरुआत भी थी और उन्होंने इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी सुनील जाखड़ जोकि अब पंजाब भाजपा के प्रधान हैं, को 82,459 वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी।