पंजाब के दिवंगत मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड मामले में सोमवार को बुड़ैल जेल स्थित विशेष अदालत में अंतिम बचे आरोपी आतंकी जगतार सिंह तारा के बयान दर्ज हुए। तारा ने अदालत को बताया कि उसने और अन्य आरोपियों ने बेअंत सिंह की हत्या के लिए कई बार इंतजार किया था। उन्हें सही समय और मौके का इंतजार था। इससे पहले तारा ने अदालत में कबूल किया था कि जिस कार का वारदात में इस्तेमाल किया गया था, वह उसने दिल्ली निवासी से खरीदी थी।
यह कार उसने वसन सिंह बनकर खरीदी थी और इसी नाम से हस्ताक्षर किए थे। अदालत में उसने उन हस्ताक्षर को पहचाना भी जो उसने कार खरीदते वक्त दस्तावेज पर किए थे। सोमवार को तारा के सीआरपीसी की धारा 313 के तहत शेष बयान दर्ज किए गए। अगली सुनवाई 4 दिसंबर को भी उसके बयान दर्ज किए जाएंगे। विशेष अदालत में सीबीआई दिल्ली की ओर से पेश हुए वकील ने तारा से बेअंत सिंह हत्याकांड से जुड़े करीब 200 सवाल पूछे।
इस पर तारा ने जवाब दिया कि उसे सूचना मिली थी कि सीएम बेअंत सिंह पंजाब सचिवालय में एक से डेढ़ बजे के करीब पहुंचेंगे। इसके बाद वह अन्य के साथ फौरन पंजाब सचिवालय पहुंचा। इसके बाद बलवंत सिंह राजोआणा और दिलावर सिंह कार में बैठे। उनकी पहले से ही तैयारी थी कि जैसे ही पुलिस कमांडो पोजिशन लेंगे तो दिलावर कार लेकर आगे बढ़ेगा, जो कि उस वक्त पुलिस वर्दी में था। इसके बाद वह वहां पहुंचते ही ब्लास्ट के लिए बटन दबा देगा।
वहीं तारा ने बताया कि उसने चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए रात 9 बजे बस पकड़ी थी। वहां पहुंचने पर ही उसे पता चला कि बेअंत सिंह की मौत हो चुकी है। बता दें कि 31 अगस्त, 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय की बिल्डिंग के पास हुए बम ब्लास्ट में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी। केएलएफ के दिलावर सिंह जयसिंहवाला ने यह आत्मघाती हमला किया था।
इस हत्याकांड में दोषी पाए गए बलवंत सिंह राजोआणा के खिलाफ पटियाला जेल में 31 मार्च 2012 को फांसी देने के वारंट अदालत ने जारी किए थे। हालांकि किन्हीं कारणों से केंद्र सरकार ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी।