चीमा ने कहा कि मोदी सरकार पंजाब में आप सरकार को अस्थिर करने की एक बड़ी साजिश के तहत पंजाब विरोधी फैसलों को लागू कर रही है, क्योंकि भाजपा को अब पंजाब के बाद गुजरात और अन्य राज्यों में आप से खतरा नजर आ रहा है। मोदी सरकार एक साजिश के तहत पंजाब पुनर्गठन एक्ट 1966 के समझौते और फैसलों को खत्म कर रही है जो राज्य के अधिकारों और संघीय ढांचे के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आम आदमी पार्टी की कामयाबी से बौखला गई है।
हरपाल सिंह चीमा ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब की पिछली कांग्रेस और अकाली-भाजपा सरकारों ने प्रदेश के हितों और हिस्सेदारी की रक्षा करने में हमेशा अनदेखी की है, क्योंकि कांग्रेस और अकाली-भाजपा सरकारों के दौरान जहां चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब के अधिकारी हटाए गए थे, वहीं बीबीएमबी जैसे संस्थान से पंजाब की हिस्सेदारी को कम किया गया। पंजाब सरकार प्रदेश के हितों की पैरवी करने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।
एसजीपीसी प्रधान ने कहा- सभी राजनीतिक पार्टियां एकजुट होकर करें इसका विरोध
एसजीपीसी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने चंडीगढ़ के मुलाजिमों के लिए केंद्र सरकार की ओर से लिए गए फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की ओर से चंडीगढ़ प्रशासन के सभी कर्मचारियों की सेवा शर्तें केंद्रीय नियमों के मुताबिक करने के एलान को पंजाब के अधिकारों पर बड़ा हमला करार दिया है। उन्होंने इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक पार्टियां से एकजुट होकर विरोध करने की अपील की है।
एडवोकेट धामी ने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब के गांवों की कीमती जमीन पर बसा है। इसलिए इस पर पंजाब का ही अधिकार है। केंद्र का ताजा फैसला पंजाब पुनर्गठन 1966 के एक्ट का उल्लंघन है। स्पष्ट है कि किसी साजिश के तहत ऐसा किया जा रहा है। इसमें भारत सरकार की पंजाब विरोधी नीयत स्पष्ट हो जाती है।
उन्होंने कहा कि समय-समय देश की सरकारों ने पंजाब खासकर सिखों के साथ धक्का किया है। केंद्रीय गृह मंत्री का एलान एक और धक्के की तरफ इशारा करता है। यह पंजाब के अधिकारों से जुड़ा मामला है, इसलिए सभी राजनीतिक पार्टियों को इसे रोकने के लिए एकजुटता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी इसका सख्त विरोध करती है और इस पंजाब विरोधी फैसले पर लड़े जाने वाले संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाएगी।