पंजाब सरकार की ओर से पांच एकड़ जमीन वाले किसानों का कर्ज माफ करने को लेकर किसान जत्थेबंदियां नाखुश हैं। उन्होंने सरकार के इस एलान को किसानों के साथ मजाक करार दिया है। जत्थेबंदियों का कहना है कि इसमें जमीन की हदबंदी नहीं होनी चाहिए और सरकार को किसानों का सारा कर्ज माफ करना चाहिए था।
90 हजार करोड़ के कर्ज में से सिर्फ 1500 करोड़ का कर्ज माफ क्यों
भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिलाध्यक्ष राम सिंह भैणीवाघा, इंद्रजीत सिंह, डकौंदा गुट के गोरा सिंह भैणीवाघा, महेंद्र सिंह भैणीवाघा, पंजाब किसान यूनियन के रूलदू सिंह कहना है कि सत्ता में आने से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों का सारा कर्ज माफ करने का वादा किया था, लेकिन अब किसानों पर चढ़े 90 हजार करोड़ के कर्ज में से सिर्फ 1500 करोड़ का कर्ज माफ कर इसको वादा पूरा करने का नाम दिया जा रहा है।
सबूत न होने के कारण रद्द हो जाते हैं केस
किसान यूनियनों के मुताबिक मानसा में अब तक 262, बठिंडा में 471, संगरूर में 287 और बरनाला में 173 किसान खुदकुशी कर चुके हैं। इसमें से बठिंडा से 209, मानसा से 228, संगरूर से 220 और बरनाला से किसान खुदकुशी के 147 केस रद्द किए जा चुके हैं। इसमें उनकी खुदकुशी के सबूत नाकाफी होना एक कारण बताया जा रहा है। जत्थेबंदियों का कहना है कि किसानों ने आढ़तियों, कारपोरेट बैंकों से कर्ज, ट्रैक्टर आदि के लिए जो भी पैसे लिए वे भी खेती से ही जुड़े हुए हैं। इसलिए सारे कर्ज पर लीक मारनी चाहिए।