कृषि बिलों के विरोध में किसानों के आंदोलन से सात थर्मल पावर स्टेशनों के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है। रेलवे ट्रैक बंद होने के कारण कोयले की आपूर्ति नहीं होने से यह समस्या बनी है। जीवीके लिमिटेड, श्रीगोविंद साहिब, गुरुगोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट और गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांट में 10 रेक से कम कोयला रह गया है। जिससे एक-दो दिन में ही इन प्लांटों के बंद होने का अनुमान है। इधर कोल इंडिया लिमिटेड ने भी पंजाब की कोयले की आपूर्ति रोक दी है।
पंजाब में किसान आंदोलन को लगभग 16 दिन हो गए हैं। सड़कों के साथ ही रेलवे ट्रैक पर भी किसान अपनी मांगों को मनवाने के लिए जमे हुए हैं। इसमें महिलाएं भी किसानों का साथ दे रही हैं। किसानों के इस आंदोलन से सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव सूबे के बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है। कोयले की आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण राज्य के थर्मल प्लांटों पर बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। रेल पटरियों के अवरुद्ध होने से थर्मल पावर स्टेशनों को कोयले की आपूर्ति मुश्किल से हो रही है।
सरकारी प्रवक्ता ने पाइपलाइनों में रेक की स्थिति का उल्लेख करते हुए बताया कि तलवंडी साबो पॉवर लिमिटेड में 38 रेक, नाभा पॉवर लिमिटेड (एनपीएल), राजपुरा (16 रेक), जीवीके लिमिटेड, श्री गोविंद साहिब (8 रेक), गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट, रोपड़ (3 रेक) और गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांट, लेहरा मोहब्बत (4 रेक) फंसा हुआ है। कोयले की कोई निकासी नहीं है और कोल इंडिया लिमिटेड ने पंजाब में थर्मल पावर स्टेशनों के लिए कोयले की अधिक लोडिंग को रोक दिया है। थर्मल पावर स्टेशनों पर कोयले का यदि यही हाल रहा तो जल्द ही पंजाब सरकार को बिजली कटौती लागू करना मजबूरी हो जाएगी।
किस प्लांट में कितने दिनों का बचा है कोयला
सरकार ने कोयले के स्टॉक की स्थिति को 'गंभीर' करार दिया है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि एनपीएल के पास 6.05 दिनों के लिए 1.05 लाख मीट्रिक टन कोयला स्टॉक, 2.79 दिनों के लिए टीएसपीएल 93,949 मीट्रिक टन, 0.62 दिनों के लिए जीवीके 4341, 6.16 दिनों के लिए जीजीएसटीटीपी रोपड़ 85,618 की आपूर्ति है। और जीएचटीपी लेहरा मोहब्बत 59,143 4.22 दिनों के लिए कोयला बचा हुआ है।
यूरियाः जरूरत है 13.5 लाख टन, है सिर्फ 1.7 लाख टन
किसानों के विरोध प्रदर्शन के एक हिस्से के रूप में रेलवे यातायात का व्यवधान राज्य के यूरिया और डीएपी की भी कमी होने लगी है। सूबे में यूरिया की वर्तमान आवश्यकता 13.5 लाख टन है, जबकि अब तक की उपलब्धता केवल 1.7 लाख टन है। इसी तरह, डीएपी की 6 लाख मीट्रिक टन आवश्यकता के अनुरूप इसकी उपलब्धता अभी सिर्फ 4.6 लाख मीट्रिक टन है।
10 मीट्रिक टन खाद्यान को नुकसान
किसान के आंदोलन के कारण खाद्यान्नों की आवाजाही पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इससे 10 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न प्रभावित हुआ है। अब तक एजेंसियों के 115 लाख मीट्रिक टन और राज्य में एफसीआई के 25 लाख टन गेहूं के भंडार हैं। एक और 65 लाख मीट्रिक टन चावल एफसीआई के साथ राज्य में पड़ा है।
दिल्ली-मुरादाबाद में फंसा बारदाना
दिल्ली और मुरादाबाद में 24,480 बारदाना फंसा हुआ है। जिसमें 22800 राज्य एजेंसियों और 1680 एफसीआई का है। कोलकाता से भेजी जाने वाली बारदाना की 7480 आपूर्ति भी फंसने की संभावना है। राज्य में पहले से ही बारदाना की कमी है। बारदाना नहीं मिलने से तरनतारन, मनसा, फिरोजपुर और फाजिल्का जिलों में स्थिति प्रभावित होगी।
किसानों को समझाने के लिए सरकार ने बनाई कमेटी
आंदोलनरत किसानों से बातचीत के लिए पंजाब सरकार ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। जिसमें कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा और सुखबिंदर सिंह सरकारिया को शामिल किया गया है। कमेटी सदस्य राज्य के विभिन्न किसान संघों, उनके प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करक मुख्यमंत्री को जानकारी देंगे।