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आखिरी हफ्ते में बदले समीकरणों ने पलटी कांग्रेस का किस्मत, 'आप' अर्श से फर्श पर आई

Sun, 12 Mar 2017 09:54 AM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Punjab Election - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब विधानसभा चुनाव के समीकरण आखिरी हफ्ते में बदल गए। मालवा के दम पर सत्ता तक पहुंचने के सपने देख रही आम आदमी पार्टी फर्श से अर्श पर पहुंच गई। जबकि शुरुआती चरण में आप से थोड़ा पीछे दिख रही कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली। पूरे पंजाब में लोग शिअद-भाजपा से बेहद नाराज थे, ऐन मौके पर वह वोट बैंक कांग्रेस की ओर शिफ्ट हो गया। आप का प्रचार पूरे पीक पर चल रहा था।
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पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल पूरे पंजाब में धुआंधार प्रचार कर रहे थे। उन्हें काफी समर्थन मिल रहा था। जिससे आश्वस्त केजरीवाल और उनकी टीम मान कर चल रही मालवा से ही पार्टी सरकार बना लेगी। इसी बीच केजरीवाल के मोगा में एक पूर्व आतंकी के घर पर रात को ठहरने की खबरें आईं। कांग्रेस और शिअद-भाजपा ने इसे लेकर आप पर हमला बोला, लेकिन आप लीडरशिप ने इसे डिफेंड किया।

हालांकि पंजाब के चुनावी माहौल में आतंकवाद, कट्टरपंथ जैसे शब्द तैरने लगे, चुनावी फिजां बदलने लगी। उसके बाद मौड़ में कांग्रेस उम्मीदवार और डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम के समधी हरमिंदर जस्सी की चुनावी सभा के पास बम ब्लास्ट हो गया। इसके बाद माहौल पूरी तरह बदल गया। इसके साथ एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत डेरे ने शिअद-भाजपा को समर्थन का एलान कर दिया।
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इन घटनाओं से माहौल पूरी तरह कांग्रेस के पक्ष में आ गया। साफ मैसेज गया कि आप का कट्टरपंथियों के साथ कनेक्शन है, जिससे पूरे पंजाब में शहरी वोटर जो पहले ही भाजपा से नाराज था, कांग्रेस की तरफ आ गया। इनमें आम कारोबारी, नौकरीपेशा, छोटे उद्यमी जैसे मध्यम वर्गीय लोग थे, जो किसी भी हालत में नहीं चाहते कि पंजाब का माहौल खराब हो। भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया, पार्टी सिर्फ तीन सीटें जीत सकी। जबकि, कांग्रेस ने 77 सीटें जीतीं, 1992 में जब शिअद ने बायकॉट किया था, तब सिर्फ पार्टी ने इससे ज्यादा सीटें जीती थीं।
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डेरे के समर्थन के चलते भी आप को हार मिली

Punjab Election - फोटो : अमर उजाला
डेरे का प्रभाव मालवा के जिन जिलों में है, वहीं आप ने आधार बनाया था। आप के समर्थक भी वही लोग थे जो डेरे के प्रेमी हैं, जिनमें ज्यादातर निम्न आय वर्ग के लोग हैं। डेरे द्वारा शिअद-भाजपा को समर्थन के एलान के बाद ये वोट बैंक आप से वापस शिअद-भाजपा में चला गया। इससे आप को नुकसान हुआ और कांग्रेस जीत गई।

दोआबा फिर बना किंग मेकर
कहा जाता है कि मालवा ही पंजाब में सरकार बनाता है, लेकिन पिछले कुछ चुनावों से दोआबा जीतने वाला ही सत्ता पर काबिज होता है, इस बार भी यही हुआ। इस बार कांग्रेस ने दोआबा से 15 सीटें जीतीं। इससे पहले 2012 और 2007 में शिअद-भाजपा ने दोआबा में ज्यादा सीटें जीती थीं और उनकी सरकार बनी थी। जबकि, 2002 में कांग्रेस दोआबा में जीती और सरकार भी उसी की बनी थी।

माझा में शिअद का किला ध्वस्त
माझा को शिअद का गढ़ माना जाता है, लेकिन पहली बार शिअद की यहां इतनी बुरी हार हुई है। शिअद सिर्फ दो और भाजपा एक सीट जीत सकी। आप यहां खाता भी नहीं खोल पाई। कांग्रेस ने 25 में से 22 सीटें जीतीं। आदेश प्रताप कैरों पहली बार हार गए। यह शायद पहला मौका होगा, जब प्रताप सिंह कैरों परिवार माझा में हार गया। विरसा सिंह वल्टोहा भी हार गए। अगर माझा में अकाली दल का इतना बुरा हाल न होता तो शायद वह मुख्य विपक्षी दल बन जाता।

पंजाब ने फिर नकारा तीसरा विकल्प
पंजाब के लोगों ने एक बार फिर तीसरे विकल्प को खारिज कर दिया है। पिछले विधानसभा चुनाव में लग रहा था कि पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब अच्छा प्रदर्शन करेगी, लेकिन मनप्रीत बादल एक भी सीट नहीं जीत सके। इस बार भी लग रहा था कि आम आदमी पार्टी को लोग सत्ता तक पहुंचा देंगे, लेकिन पार्टी बीस सीटों पर सिमट गई।
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