सिरसा डेरा प्रेमियों ने पंजाब चुनाव में शिअद-भाजपा को समर्थन दिया, लेकिन वो काम नहीं आया। वहीं इन्होंने आम आदमी पार्टी के अभियान को भी रोक दिया था। पंजाब के मालवा क्षेत्र की 69 विधानसभा सीटों में वर्चस्व के बल पर सत्ता में आने का आम आदमी पार्टी का सपना धराशायी हो गया। पार्टी को 117 में से कुल 22 सीटें ही मिलीं, जिनमें से 19 सीटें मालवा क्षेत्र से हासिल हुई हैं।
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फिर भी, दिल्ली के बाहर पंजाब में पहली बार विधानसभा चुनाव में उतरी आप के प्रदर्शन ने विधानसभा में उसे नेता प्रतिपक्ष का पद तो दिला ही दिया है। मालवा क्षेत्र में आप के इस प्रदर्शन का सीट के मुताबिक आकलन किया जाए तो यह रोचक तथ्य सामने आता है कि डेरा सच्चा सौदा की ओर से शिअद-भाजपा गठबंधन को दिया गया समर्थन आप के खराब प्रदर्शन का बड़ा कारण बना।
पंजाब को लेकर एग्जिट पोल के अधिकांश नतीजों में कांग्रेस और आप को लगभग बराबर सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। कुछ एग्जिट पोल तो आप की सरकार बनने की भविष्यवाणी भी कर रहे थे, लेकिन मतदान से ऐन पहले डेरा सच्चा सौदा की ओर से शिअद-भाजपा गठबंधन को डेरा प्रेमियों के समर्थन का एलान किए जाने से समीकरण बदल गए।
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चुनाव नतीजे आए तो पटियाला, मुक्तसर, फिरोजपुर, फाजिल्का और फतेहगढ़ साहिब जिलों की कुल 23 विधानसभा सीटों में से आप को एक भी सीट नहीं मिली, वहीं बरनाला जिले की तीनों सीटों पर आप ने जीत हासिल की।
मालवा में सबसे ज्यादा थे डेरा प्रेमी
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- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा मोगा में निहालसिंह वाला, लुधियाना में दाखा, जगराओं, खन्ना, रायकोट के अलावा बैंस बंधुओं की पार्टी के हिस्से में आई आत्मनगर व लुधियाना साउथ सीटें, रोपड़ जिले में रोपड़ सीट, फरीदकोट जिले में जैतों व कोटकपुरा, संगरुर जिले में दिड़बा व सुनाम, मोहाली जिले की खरड़, बठिंडा जिले में बठिंडा रूरल, मौड़ व तलवंडी साबो सीट आम आदमी पार्टी के हिस्से में आई है।
दूसरी ओर, शिअद जिसे डेरे का समर्थन मिला, उसकी झोली में सनौर, लंबी, मुक्तसर, साहनेवाल, अबोहर (भाजपा), जलालाबाद, लहरा, डेरा बस्सी की ही सीटें आई हैं। यानी, मालवा क्षेत्र की बाकी सभी सीटों पर कांग्रेस ने जीत का परचम लहरा दिया है। डेरा सच्चा सौदा की ओर से पंजाब में डेरा प्रेमियों के 35 लाख से अधिक वोट होने का दावा किया गया है।
इनमें मालवा क्षेत्र के जिलों में डेराप्रेमियों की तादाद सबसे ज्यादा है, लेकिन बीते कुछ चुनावों पर नजर डाली जाए तो डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की ओर से जिस पार्टी को भी समर्थन का एलान किया जाता है, वह पार्टी सत्ता में नहीं आ पाती। वर्ष 2007 में डेरे ने कांग्रेस को समर्थन दिया तो सूबे में शिअद-भाजपा की सरकार बन गई।
दिल्ली में भी दिया था भाजपा को समर्थन, पर जीते नहीं
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इसी तरह दिल्ली विधानसभा चुनाव में डेरे ने भाजपा को समर्थन दिया और सरकार बनी आम आदमी पार्टी की। इस बार डेरे ने पंजाब में शिअद-भाजपा गठबंधन को समर्थन दिया। गठबंधन की सरकार तो नहीं लेकिन इस समर्थन का खामियाजा आम आदमी पार्टी को भुगतना पड़ गया।
मालवा क्षेत्र की जिन सीटों पर भी कांग्रेस प्रत्याशी जीते हैं, वहां दूसरे और तीसरे स्थान पर शिअद व आप प्रत्याशी ही रहे। खास बात यह भी रही कि ज्यादातर सीटों पर शिअद व आप प्रत्याशियों के मिले कुल वोट विजयी प्रत्याशी को हासिल हुए वोटों से ज्यादा हैं।
यानी, इस बार कांग्रेस को तो अपना कैडर वोट मिल गया, लेकिन एंटी इनकम्बेंसी के चलते शिअद से जो वोट खिसक रहे थे, वह कांग्रेस या आप की तरफ जाने की बजाय काफी हद तक शिअद के पास ही आ गए। इसके अलावा आप के साथ जुड़े डेराप्रेमियों ने भी अंतिम समय में डेरे के आदेश का पालन किया, हालांकि इसका फायदा कांग्रेस को हुआ।