पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) की जीत से पंजाब में अब तक के चुनावों में हावी रहने वाले डेरा फैक्टर को फेल साबित कर दिया। सूबे की सियासत में इन डेरों ने समय-समय पर अहम भूमिका निभाई है। इस बार के चुनावों में भी राजनीतिक दलों ने डेरों के वोट हासिल करने के लिए खूब दौड़ लगाई। यहां तक कि जेल में सजा काट रहे राम रहीम को फरलो तक दी गई लेकिन उनकी यह जुगत काम नहीं आ पाई। पंजाब के लोगों ने इस बार डेरा फैक्टर न मानते हुए अपनी मर्जी के अनुसार वोट किया।
पंजाब मालबा, माझा और दोआबा में लगभग 10000 डेरे संचालित होते हैं। इनमें से 300 के करीब ऐसे डेरे हैं जो हर बार चुनाव आते ही सक्रिय हो जाते हैं। सियासतदान भी चुनाव में लाभ लेने के लिए डेरों के चक्कर काटने शुरू कर देते हैं। एक अनुमान के अनुसार 53 लाख लोग इन डेरों से जुड़े हुए हैं। कुल वोट का यह करीब 25 प्रतिशत हिस्सा डेरों से जुड़ा हुआ है।
यह भी बताया जाता रहा है कि पंजाब में अलग-अलग डेरों की 1.13 लाख शाखाएं हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार पंजाब की कुल 117 विधानसभा सीटों में से 93 सीटें ऐसी हैं जहां डेरा फैक्टर काम करता है। अभी तक जितने भी चुनाव हुए हैं इनमें डेरों की अहम भूमिका रही है, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी सत्ता में आने से डेरा फैक्टर को लेकर सभी रणनीति फेल साबित हुई है।
इन दिग्गजों ने ली डेरों की शरण
पंजाब में सभी राजनीतिक दलों कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने डेरा वोट पर डोरे डालने के लिए हर संभव प्रयास किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह से लेकर नवजोत सिंह सिद्धू, चरणजीत सिंह चन्नी, सुखबीर बादल, कैप्टन अमरेंद्र सिंह तक सभी ने डेरा वोट के लिए अपनी-अपनी रणनीति के अनुसार योजना को फलीभूत किया।
आप ने बनाए रखी दूरी
इस चुनाव में अन्य दलों से इतर आम आदमी पार्टी ने डेरों से दूरी बनाए रखी। आम आदमी पार्टी का कोई भी नेता डेरों में नहीं पहुंचा। उन्होंने यदि कुछ डेरों में मुलाकात की भी तो उसे पूरी तरह से रणनीति के तहत गुप्त रखा। खुले तौर पर आप के नेता डेरों में नहीं दिखाई दिए।
मालवा में सबसे ज्यादा प्रभाव
पंजाब के प्रमुख मालवा क्षेत्र में डेरा फैक्टर का सबसे ज्यादा प्रभाव है। यहां डेरा सच्चा सौदा, डेरा बल्लां, डेरा ब्यास, संत निरंकारी मिशन, नामधारी डेरा और दिव्य ज्योति जागृति संस्थान 6 प्रमुख डेरे हैं। मालवा की कुल 69 सीटों में से 35 से 40 सीटों पर डेरों का बेहद प्रभाव है। आप को इसे क्षेत्र से 40 प्रतिशत सीटें तक मिली हैं।
माझा में थोड़ा असर
माझा में 25 विधानसभा सीटें आती हैं। यहां डेरों का ज्यादा प्रभाव नहीं दिखता है। कुछ डेरे हैं जिनका थोड़ा असर 10 से 11 विधानसभा सीटों पर असर रहता है। इस बार हालात कुछ अलग दिख रहे हैं।
दोआबा में डेरों का प्रभाव
पंजाब के दोआबा क्षेत्र में 25 विधानसभा सीटें आती हैं। इस क्षेत्र की 10 से 12 सीटों पर प्रभाव रखता है। 2017 के चुनावों तक इन डेरों ने अपनी अहम भूमिका निभाई और नेताओं के खेल बनाने और बिगाड़ने का काम किया, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग रही।
खुलकर नहीं किया समर्थन
इस बार के विधानसभा चुनावों से पहले सभी डेरों ने खुलकर किसी पार्टी को समर्थन देने से खुद को दूर रखा, हालांकि अंदरखाते अनुयाइयों को संदेश जारी होते रहे। किसी डेरे ने कांग्रेस को तो किसी ने शिरोमणि अकाली दल को जीत दिलाने के लिए वोट करने को कहा।