बादल, केजरीवाल और कैप्टन अमरिंदर सिंह
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चुनावी साल में सभी सियासी दल प्रवासी भारतीयों को लुभाने में जुट गए हैं। पंजाब के अहम एनआरआई वर्ग पर सभी पार्टियों का फोकस है। सभी के नेता विदेश दौरे कर रहे हैं। एनआरआई पंजाब का अहम वर्ग है। उनके वोट यहां बेशक न हों, लेकिन अपने इलाकों में अच्छी पैठ है। वह सियासी दलों के लिए फंडिंग का अहम जरिया भी हैं।
अकाली दल ने प्रवासी भारतीयों के लिए संगत दर्शन किए, कई योजनाएं शुरू कीं, लेकिन कुछ महीने पहले पंजाब में हुई घटनाओं के अलावा नशों और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर एनआरआई का भरोसा कमजोर हुआ है। इसे देखते हुए दूसरी पार्टियां एनआरआई को अपने पक्ष में करने में जुट गई हैं।
पिछले दिनों आम आदमी पार्टी के सूबा कन्वीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर ने यूरोप का दौरा किया। इस दौरान इतना फंड जुटाया गया कि उसकी आंच पंजाब तक पहुंच गई। अकाली दल ने यहां फंड को लेकर सवाल उठाए। पर आप का मानना है कि दौरा कामयाब रहा।
अब आप के एक और नेता सुखपाल खैरा पंद्रह अप्रैल से यूएस दौरे पर जा रहे है। वह कई शहरों में बड़ी संख्या में बैठकों को संबोधित करेंगे। कांग्रेस को भी लग रहा है कि अकाली दल से नाराज एनआरआई वर्ग कहीं आप की ओर न खिसक जाए, इसलिए वह भी पूरे जोर-शोर से जुट गई है। पिछले दिनों पूर्व विदेश राज्यमंत्री परनीत कौर ने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा किया था।
अब प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह 19 अप्रैल से विदेश दौरे पर जा रहे हैं। वह भी कई शहरों में एनआरआई से मुलाकात करेंगे। कांग्रेस का एनआरआई विंग भी विदेशों में सक्रिय है। कैप्टन पहले ही संकेत दे चुके हैं कि एनआरआई की ओर से आप को हो रही फंडिंग रोकना और एनआरआई को कांग्रेस के पक्ष में करना उनका मकसद होगा।
अकाली दल भी इसमें पीछे नहीं है। हाल ही में शिअद सुप्रीमो और डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने कई देशों की पार्टी इकाइयों का गठन किया। इसके साथ ही इन देशों के यूथ विंग का ऐलान भी किया गया। इससे बड़ी संख्या में प्रभावशाली एनआरआई को पार्टी से जोड़ा गया।