इस बीच, प्रदेश में आम आदमी पार्टी का प्रचार अभियान रंग लाया और बाकी दलों की चिंता बढ़ने लगी। विभिन्न मीडिया सर्वे भी आप को सबसे ज्यादा सीटें मिलती दिखाने लगे। कुछ सर्वे में पंजाब में अगली सरकार आप की बनना तय बताया गया।
फरवरी आरंभ होने तक हालात यह दिखाई देने लगे कि इस बार सूबे में मुख्य चुनावी मुकाबला आप और कांग्रेस के बीच होगा, जबकि शिअद-बसपा और भाजपा-पीएलसी-संयुक्त अकाली दल के गठबंधन तीसरे-चौथे स्थान पर खिसक जाएंगे। हालांकि मतदान का दिन करीब आते-आते पूरा दृश्य बदल गया।
केजरीवाल का यह बयान कि पंजाब के हिंदू डरे हुए हैं, को कांग्रेस ने हाथोंहाथ लिया और आप पर पंजाब के हिंदू-सिखों को धर्म के आधार पर बांटने का आरोप लगाया। भाजपा और कई हिंदू संगठन भी इस मुद्दे पर आप के खिलाफ प्रचार में उतर आए। इस तरह पूरा चुनाव प्रचार जनता के मुद्दों को पीछे छोड़ सियासी दलों और नेताओं के बीच कुर्सी की खींचतान की शक्ल ले गया।
कुमार विश्वास के बयान के बाद केजरीवाल पर चौतरफा हमला
इसी बीच, पंजाब के चुनाव प्रचार के माहौल में कवि कुमार विश्वास की एंट्री हुई। विश्वास ने केजरीवाल पर खालिस्तानी संगठनों से साठगांठ के गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद सभी सियासी दल आप के खिलाफ लामबंद हो गए। इस दौरान पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस के राहुल और प्रियंका गांधी प्रचार कर रहे थे। उन्होंने केजरीवाल पर आरोपों को आतंकवाद से जोड़ते हुए हवा दी। हालांकि कुमार विश्वास अपने आरोपों का कोई सबूत पेश नहीं किया, लेकिन विपक्षी दलों ने आप को घेरने के लिए विश्वास के बयान को ही हथियार बना लिया। इसी दौरान मुख्यमंत्री चन्नी ने भी यूपी-बिहार के पंजाब में बसे लोगों का मुद्दा उठाया, जिसे सिख वोटों के ध्रुवीकरण की संज्ञा दी गई।