निजी स्कूलों की तरफ से किताबों और फंडों के नाम पर की जा रही लूट का सख़्त नोटिस लेते हुए शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। विभाग की तरफ से हर जिले के लिए टास्क फोर्स बनाई गई है। टास्क फाेर्स में उस जिले के तीन-तीन प्रिंसिपलों को शामिल किया गया है। यह टास्क फोर्स शिक्षा मंत्री को प्राप्त शिकायत की जांच का काम करेगी और अपनी रिपोर्ट रेगुलेटरी अथॉरिटी को सौंपेगी। इस संबंधी विभाग ने एक ईमेल आईडी emofficepunjab@gmail.com बनाई है, जहां से लोग अपनी शिकायत शिक्षा विभाग तक पहुंचा पाएंगे।
शिक्षामंत्री हरजोत सिंह बैंस ने एक वीडियो संदेश में बताया कि बीते कई दिनों से निजी स्कूलों की तरफ से किताबों /कापियों और अलग-अलग फंडों के नाम और माता-पिता की लूट करने की शिकायतें मिल रही थीं। इस संबंधी कुछ दिन पहले राज्य के समूह ज़िला शिक्षा अफ़सरों के द्वारा निजी स्कूलों को एक पत्र जारी करके स्कूल रेगुलेटरी अथॉरिटी की तरफ से किताबों/ कापियों और फीस/फंडों संंबधी हिदायतों की पालना करने के लिए कहा गया था।
उन्होंने बताया स्कूलों की तरफ से की जा रही लूट सम्बन्धी मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी शिकायत मिलीं हैं। जिनका मुख्यमंत्री ने गंभीर नोटिस लेते हुए हिदायत की कि महंगे प्रकाशकों की किताबें लगा कर निजी स्कूलों की तरफ से की जाती लूट को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
मंहगी नहीं, सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाए स्कूल
शिक्षामंत्री ने बताया उनको यह जानकर बहुत हैरानी हुई है कि निजी स्कूलों की तरफ से एक क्लास की किताबें ही 7000 रुपए की बेची जा रही हैं जिनमें पहली कक्षा के गणित विषय की किताब ही 600 रुपए की है। निजी स्कूलों के मालिकों और मैनेजमेंटों को हिदायत की कि वह स्कूलों में सिर्फ़ एनसीईआरटी की ही किताबें लगाएं।
स्कूलों के बाहर डिस्प्ले करनी होगी सूची
नियमों अनुसार छोटे शहरों में स्थित स्कूल को तीन से पांच दुकान के नाम स्कूल के बाहर लिख कर लगाने होते हैं। जबकि बड़े शहरों जैसे लुधियाना, जालंधर और अमृतसर आदि भी बीस-बीस दुकानों की लिस्ट स्कूल के बाहर लगानी होती है जहाँ से विद्यार्थी किताब खरीद सकें। यह प्रक्रिया सभी को पूरी करनी होगी
तीस अप्रैल तक स्कूलों को देना होगा बढ़ाई फीस का ब्योरा
शिक्षा विभाग ने स्कूलों द्वारा बढाई गई फीस व फंडों का सारा रिकॉर्ड तलब किया है। 30 अप्रैल तक नियमों अनुसार स्कूल की तरफ से की गई फीस/ फंडों की वृद्धि, स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी सम्बन्धित जानकारी भर कर शिक्षा विभाग को जमा करवानी होग। निजी स्कूलों की तरफ से जमा करवाई गई जानकारी पड़ताल भी की जागएी।