पंजाब में कांग्रेस जीत हासिल करने के लिए नया सुपर प्लान बनाया है। इसके बारे में सभी नेताओं को सूचित कर दिया गया है। काफी समय से बिखरी और गुटों में बंटी नजर आ रही पंजाब कांग्रेस एकाएक संगठित दिखाई देने लगी है।
इसे बड़े नेताओं केचुनाव मैदान में उतरने का करिश्मा कहें या हाईकमान के सख्त तेवर, पार्टी की सेकेंड व थर्ड लाइन के लीडरों ने फिलहाल चुनाव तक आपसी रंजिश भुलाकर पार्टी प्रत्याशियों को जिताने की मुहिम चलाने का फैसला कर लिया है। ऐसा ही रुख कांग्रेस में ग्रासरूट लेवल के वर्करों का भी दिखाई दे रहा है, जो अपने-अपने हलके में पार्टी प्रत्याशी के साथ दिखने लगे हैं।
दिसंबर के अंत तक जबरदस्त बगावत
पंजाब कांग्रेस में बीते दिसंबर माह के अंत तक नई प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर जबरदस्त बगावत शुरू हो गई थी। प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा और कैप्टन अमरिंदर सिंह के धड़े आमने-सामने आ गए थे।
लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की पहली लिस्ट घोषित किए जाने तक राज्य में पार्टी की यही हालत बनी रही। लेकिन जैसे ही हाईकमान ने कुछ बड़े नेताओं को मैदान में उतारा, माहौल बदलने लगा।
कैप्टन के रोड शो में पहली बार कांग्रेस एकजुट नजर आई। रोड शो में कैप्टन समर्थकों का पहुंचना ता लाजिमी था, बाजवा, रजिंदर कौर भट्ठल और जगमीत बराड़ के करीबी समझे जाने वाले कांग्रेसी भी रोड शो में शामिल हुए। इस बाद प्रदेश भर में तेज हुए चुनाव प्रचार में अब कांग्रेस के सभी छोटे-बड़े नेता सभी जिलों में आपसी दुश्मनी भुलाकर एकजुट हो गए हैं।
सब मिलकर आए कैप्टन के साथ
अमृतसर में लंबे समय से एक-दूसरे से विरोधी रहे सुखबिंदर सिंह सुखसरकारिया और ओपी सोनी ने हाथ मिला लिया। वहीं लाली मजीठिया भी मनमुटाव भुलाकर कैप्टन के साथ हो लिए हैं।
नवांशहर में विधायक गुरइकबाल कौर के विरोधी रहे सतबीर सिंह पल्लीझक्की और ललित मोहन पाठक ने भी गुरइकबाल कौर के साथ आकर सबको हैरान कर दिया है। अंबिका सोनी के लिए गुरइकबाल के समागम में दोनों नेता अपने समर्थकों सहित पहुंचे और गिले-शिकवे भुलाकर मंच पर बैठे। पाठक ने इस मौके पर मंच का संचालन भी किया।
रोपड़ में राणा केपी, रमेश दत्त, सुखविंदर सिंह, अमरजीत सैनी ने जिला प्रधान हरभाग सैनी पर तानी तलवारें फिलहाल म्यान में रख ली हैं। वे सब एक जुट तोनहीं हुए, पर सभी अपने हलकों में चुनाव प्रचार में जुट गए हैं।
फिरोजपुर में नाराज राणा गुरमीत सोढी मान गए हैं तो संगरूर से आजाद लड़ने वाले सुरजीत धीमान भी बैठ गए हैं। लुधियाना, जालंधर, होशियारपुर, फतेहगढ़ साहिब, खडूर साहिब और फरीदकोट में नए प्रत्याशी उतारने का यह फायदा हुआ कि पुराने नेताओं से नाराज लोग उम्मीदवारों के साथ हो गए हैं।
मनप्रीत को बठिंडा में नहीं मिल रहा हाथ का साथ
बठिंडा से कांग्रेस-पीपीपी उम्मीदवार मनप्रीत बादल को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बठिंडा में कांग्रेस के दोनों दिग्गज अभी तक मनप्रीत के साथ नहीं आए हैं।
हरमिंदर जस्सी की नजर तलवंडी साबो उपचुनाव पर है, जहां से वह अपने बेटे को लड़ाना चाहते हैं। सुरिंदर सिंगला गुट भी अब तक मैदान में नहीं आया है। सिर्फ जिला प्रधान मोहनलाल झुंबा इन दिनों मनप्रीत के साथ चल रहे हैं।
मानसा में मनप्रीत को कुछ राहत है। यहां अजीत इंदर मोफर, शेर सिंह गागोवाल और सीपीआई केहरदेव अर्शी उनके साथ दिखाई दे रहे हैं। वहीं, पटियाला में भी ब्रह्म मोहिंद्रा, रणदीप नाभा अब तक उम्मीदवार के हक में नहीं निकले हैं।