एसपी मंजीत सिंह और डीएसपी एआर शर्मा के नेतृत्व में सुबह 6:30 बजे पुलिस चंडीगढ़ स्थित खैरा के घर पहुंची। पुलिस वाले कोई जबरदस्ती न कर पाएं इसके चलते खैरा सोशल मीडिया पर लाइव हुए, जहां वह पुलिस वालों से सवाल जवाब करते नजर आए। पुलिस का कहना था कि उन्हें एक पुराने एनडीपीएस मामले में एक डीआईजी रैंक के अधिकारी और दो एसएसपी के नेतृत्व वाली एसआईटी द्वारा की गई जांच की सिफारिश पर गिरफ्तार किया जा रहा है।
वहीं, खैरा ने दावा किया कि मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द कर दिया गया था, ऐसे में उनकी गिरफ्तारी गलत है। वह लगातार सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, उसके चलते उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। वह ऐसी कार्रवाई से से डरने वाले नहीं हैं। इस मामले के खिलाफ अपनी जंग लड़ेंगे।
ऐसे चला था सारा मामला
गत अकाली-भाजपा सरकार के समय में जलालाबाद पुलिस थाने में साल 2015 में एफआईआर नंबर-35 दर्ज की गई थी। यह ड्रग तस्करी से जुड़ा मामला था। आप प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने बताया मामले में मार्केट कमेटी ढिलवां के पूर्व चेयरमैन गुरदेव सिंह सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया था।
आरोपी गुरदेव सिंह और मनजीत सिंह खैरा के करीबी थे। वह सुखपाल खैरा के चुनाव को मैनेज करते थे। साल 2017 में ईडी ने एक चार्जशीट पेश की। इसमें खैरा पर मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज किया था। इसमें उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी क्योंकि उनकी आय आमदनी से अधिक थी। इस मामले में जब अन्य लोगों को सजा हो गई तो सुखपाल खैरा सुप्रीम कोर्ट चले गए थे।
2022 में सुप्रीम कोर्ट ने सुखपाल खैरा को राहत तो दी थी लेकिन कोर्ट ने अपने आदेश में साफ लिखा था कि पंजाब पुलिस इस मामले की दोबारा जांच कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर ही पंजाब पुलिस की एसआईटी ने इस मामले की दोबारा जांच शुरू की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आर्डर की कॉपी भी पढ़कर सुनाई। दूसरी तरफ सुखपाल खैरा के बेटे मेहताब ने कहा कि वह इस मामले में कानूनी जंग लड़ेंगे।