महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ शुक्रवार को जहां कांग्रेस ने पूरे देश में केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, वहीं पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व में भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस भवन के बाहर धरना दिया।
इसके बाद कांग्रेस नेता और वर्कर पंजाब के राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के लिए राजभवन की तरफ जाने लगे लेकिन पुलिस ने सेक्टर-15 में ही बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। कांग्रेस के नेताओं और वर्करों ने पहले तो बैरिकेड के सामने ही प्रदर्शन शुरू कर दिया और बाद बैरिकेड फांदकर आगे निकलने की कोशिश शुरू हो गई। चंडीगढ़ पुलिस की तरफ से जहां भारी संख्या में जवानों को तैनात किया गया था।
कांग्रेसी वर्कर जब बैरिकेडिंग पर चढ़ आगे निकलने लगे और इस दौरान उन्होंने कई बैरिकेड गिरा भी दिए। इस दौरान उनकी पुलिस के साथ धक्कामुक्की भी हुई। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल कर उन्हें तितर-बितर किया। बाद में कांग्रेस नेताओं को पुलिस हिरासत में लेकर सेक्टर-3 थाने ले गई, जहां से शाम को सभी को रिहा कर दिया गया।
इससे पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस भवन के सामने केंद्र सरकार के खिलाफ महंगाई और बेरोजगारी को लेकर जमकर नारेबाजी की। अपने संबोधन में पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष राजा वड़िंग ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों से पूरा देश परेशान है, जिससे आम आदमी को महंगाई के बोझ तले कुचला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्ज्वला योजना के तहत घरों तक सिलिंडर पहुंचाए और गैस कनेक्शन दिए, लेकिन आज वही लोग सिलिंडरों को कबाड़ के भाव बेचने में लगे हैं। उन्होंने विभिन्न खाद्य पदार्थों पर जीएसटी बढ़ाने के केंद्र सरकार के फैसले की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बताते हुए कहा कि केंद्र ने हर कदम पर जनविरोधी फैसले लिए हैं, जिसका कांग्रेस लगातार विरोध करती रही है।
इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लोगों की आवाज उठाने के लिए सड़कों पर उतरी है, क्योंकि केंद्र की गलत नीतियों ने लोगों के जीवन को कठिन बना दिया है। उन्होंने कहा कि अगर आम लोग या विपक्षी दल सरकार की गलत नीतियों, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करते हैं तो केंद्र सरकार उन्हें ईडी समेत अन्य एजेंसियों के जरिये परेशान करती है।