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Chandigarh News: पंजाब सीएम के ओएसडी घुम्मन की अर्जी खारिज, सीबीआई को राहत

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अदालत ने कहा- तलाशी पूरी होने के बाद एफआईआर वेबसाइट पर अपलोड करना आदेश की अवहेलना नहीं
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एफआईआर मीडिया में लीक करने और अवमानना की कार्रवाई की मांग की थी विशेष सीबीआई अदालत ने याचिका में नहीं पाया दम
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन को विशेष सीबीआई अदालत से झटका लगा है। अदालत ने सीबीआई के खिलाफ एफआईआर मीडिया में लीक करने और अदालत के आदेश की अवहेलना करने के आरोप में दायर उनकी अर्जी खारिज कर दी। विशेष न्यायाधीश भावना जैन ने स्पष्ट किया कि तलाशी अभियान पूरा होने के बाद एफआईआर को सीबीआई की वेबसाइट पर अपलोड करना अदालत के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन नहीं था। एफआईआर अपलोड करने पर रोक केवल तलाशी पूरी होने तक लागू थी।
अदालत ने कहा कि तलाशी पूरी होने के बाद सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप एफआईआर वेबसाइट पर अपलोड करने का अधिकार था। ऐसे में सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग करने वाली अर्जी में कोई दम नहीं है।
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तलाशी अभियान के दौरान मिली थी अस्थायी छूट
सीबीआई ने पांच अक्तूबर 2026 को राजबीर सिंह घुम्मन और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। मामला सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा-तीन, नई दिल्ली में दर्ज हुआ था। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और 420 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7, 7ए, 8 और 12 लगाई गई थीं।
घुम्मन ने अदालत में अर्जी दाखिल कर कहा था कि छह अक्तूबर को सीबीआई ने संवेदनशील मामले को देखते हुए एफआईआर वेबसाइट पर अपलोड नहीं करने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने तलाशी अभियान और साक्ष्यों की सुरक्षा के मद्देनजर अस्थायी छूट दी थी। इसके बावजूद सात अक्तूबर को एफआईआर मीडिया में पहुंच गई। घुम्मन ने इसे आदेश की अवहेलना बताते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

वेबसाइट पर अपलोड होने के बाद दायर हुई अर्जी

सीबीआई ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि तलाशी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट करने या उनसे छेड़छाड़ की आशंका के कारण एफआईआर अपलोड नहीं की गई थी। तलाशी पूरी होने के बाद इसे वेबसाइट पर डाल दिया गया। एजेंसी ने एफआईआर मीडिया में लीक करने के आरोप के समर्थन में सबूत होने से भी इनकार किया।
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अदालत ने रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि सात अक्तूबर को दोपहर करीब 1:20 बजे एफआईआर वेबसाइट पर अपलोड की गई थी, जबकि उसी दिन शाम करीब चार बजे घुम्मन की ओर से अवमानना की कार्रवाई की मांग वाली अर्जी दायर हुई। अदालत ने कहा कि छह अक्तूबर के आदेश में एफआईआर को अनिश्चितकाल तक अपलोड करने से नहीं रोका गया था। रोक केवल तलाशी पूरी होने तक थी। इसी आधार पर अदालत ने अर्जी खारिज कर दी।
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