भारत सरकार द्वारा पंजाब के स्थानीय उद्योगों को वाघा-अटारी सरहद द्वारा एलएमओ का पाकिस्तान से आयात करने की आज्ञा देने से इनकार कर दिया गया है। कैप्टन ने कहा, ‘मुझे यह बताते हुए अफसोस हो रहा है कि हमें वैकल्पिक स्रोतों से पर्याप्त सप्लाई का भरोसा देने के बावजूद ऐसा नहीं हुआ।’
पंजाब को नहीं मिल रहा एलएमओ का निर्धारित कोटा : कैप्टन
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को बाहर से एलएमओ की मौजूदा समय में कुल सप्लाई 195 मीट्रिक टन मिल रही है, जिसमें से 90 मीट्रिक टन बोकारो से और बाकी 105 मीट्रिक टन हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के एलएमओ केंद्रों से मिल रही है। पंजाब को रोजाना निर्धारित कोटा नहीं मिल रहा है। मौजूदा समय में पंजाब का पानीपत (हरियाणा) से 5.6 मीट्रिक टन, सेला कुई देहरादून (उत्तराखंड) से 100 मीट्रिक टन और रुड़की से 10 मीट्रिक टन का बैकलॉग है।
‘20 टैंकर मांगे, केंद्र ने सिर्फ दो देने का भरोसा दिया’
मुख्यमंत्री ने टैंकरों की कमी का हवाला देते हुए कहा कि राज्य रोजाना दो खाली टैंकर हवाई मार्ग से रांची भेज रहा है और भरे हुए टैंकर 48 से 50 घंटे में सड़क मार्ग से बोकारो से पंजाब लौट रहे हैं। राज्य सरकार ने पहले ही बोकारो से रोजाना 90 मीट्रिक टन की नियमित निकासी के लिए भारत सरकार को 20 अतिरिक्त टैंकर (रेल सफर के अनुकूल) अलॉट करने की अपील की थी लेकिन राज्य को यह बताया गया कि सिर्फ दो टैंकर ही मुहैया करवाए जाएंगे। हालांकि वे भी अभी मिलने बाकी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को तुरंत मामले में दखल देकर इस बड़े संकट को हल करने की अपील की।