टीकाकरण के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उपलब्धता को बेहतर करने के लिए केंद्र सरकार और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया दोनों के साथ लगातार संपर्क बना रही है। मीटिंग में अमृतसर से गुरजीत सिंह औजला, पटियाला से परनीत कौर, फतेहगढ़ साहिब से डॉ. अमर सिंह, खडूर साहिब से जसबीर सिंह गिल, लुधियाना से रवनीत सिंह बिट्टू, जालंधर से संतोख सिंह चौधरी, श्री आनंदपुर साहिब से मनीष तिवारी और फरीदकोट से मुहम्मद सदीक, राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा, शमशेर सिंह दूलो और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ मौजूद रहे।
सांसदों ने एमपीलैड फंड की पेशकश की
दोनों सदनों के संसद सदस्यों ने वादा किया कि उनके एमपीलैड फंड का इस्तेमाल सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट स्थापित करने के लिए किया जाए ताकि पंजाब में इलाज के लिए पड़ोसी राज्यों से मरीजों के आने के कारण राज्य पर पड़ रहे भार से निपटा जा सके।
वेंटिलेटर की कमी से भी जूझ रहा पंजाब : कैप्टन
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑक्सीजन, टैंकरों, वैक्सीन और दवाओं की कमी के अलावा राज्य वेंटिलेटर फ्रंट पर भी जूझ रहा है क्योंकि भारत सरकार द्वारा प्राप्त 809 वैंटिलेटरों में से 108 को स्थापित करने के लिए कोई भी बीईएल इंजीनियर नहीं है।
दवा की 650 शीशियां मांगीं, 200 मिली : कैप्टन
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के प्रति केंद्र की उदासीनता इसी से साफ हो जाती है कि अन्य राज्यों को टोसीलीजुमब की ज्यादा सप्लाई दीं गई। इसका आयात और वितरण भारत सरकार द्वारा नियंत्रित किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य ने 650 शीशियों की मांग की थी परंतु शुरुआती चरण में सिर्फ 200 ही दीं गई जिनका वितरण सरकारी और निजी अस्पतालों में किया गया। उन्होंने कहा कि रेमडिसिवर की सप्लाई बहुत कम है क्योंकि राज्य को अलॉट की गई 50000 शीशियों की सप्लाई बहुत धीमी है।