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'विपक्षी छवि खराब करने की बजाय, नशे के खिलाफ एक हो जाएं'

Fri, 26 Jun 2015 11:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संगरूर
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मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने विरोधी दलों द्वारा नशों की समस्या संबंधी पंजाब की छवि खराब करने वाली की जा रही बयानबाजी पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते कहा कि सूबा नशों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। राजनीतिक पार्टियां ऐसा कुप्रचार करने के बजाय अपना सहयोग करें।
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सीएम बादल वीरवार को धूरी विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में संगत दर्शन कार्यक्रम कर रहे थे। सीएम बादल ने कहा कि नशे की समस्या पूरे देश की समस्या है, लेकिन इसके खिलाफ सिर्फ पंजाब लड़ रहा है और कुछ राजनीतिक दल इस सच्चाई को नजरअंदाज करके पंजाबियों को बिना मतलब बदनाम कर रहे हैं।

पंजाब में किसी भी किस्म का नशा पैदा नहीं होता, लेकिन नशों के तस्करों विरुद्ध कार्यवाई को गलत ढंग से प्रचारित किया जा रहा है। पंजाब, अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ लगता राज्य है। तस्करों ने पड़ोसी देशों से हेरोइन जैसे नशों की सप्लाई के लिए राज्य को ‘ड्रग रूट’ के तौर पर इस्तेमाल के प्रयास किए।
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हालांकि पंजाब सरकार ने अपने कठोर कदम उठाते हुए तस्करों की इस सप्लाई लाइन को तोड़ने में सफलता हासिल की है। सिंथेटिक नशों का कारोबार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तो इन प्रयासों को राजनीतिक दलों ने गलत तरीके से पेश करना शुरू कर दिया है।

नशा छोड़ने वाले व्यक्तियों के लिए भी प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जिले में नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसके तहत 26 जून को होशियारपुर में पुनर्वास केंद्र का उद्घाटन किया जा रहा है। इस मौके पर राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा, कैबिनेट मंत्री शरणजीत सिंह ढिल्लों, विधायक गोबिंद सिंह लोंगोवाल, केजेएस चीमा मौजूद थे।

संगरूर में ‘स्पेशल स्कूल’ खोला जाएगा
मुख्यमंत्री ने संगरूर जिले के होनहार बच्चों के लिए घोषणा करते कहा कि संगरूर शहर में ‘स्पेशल स्कूल’ खोला जाएगा। वहां सरकारी स्कूलों में मैट्रिक श्रेणी में अस्सी प्रतिशत या इससे अधिक अंक हासिल करने वाले बच्चों को 11वीं और 12वीं की शिक्षा एवं रहने की सुविधा मुफ्त दी जाएगी। ऐसे स्कूल मोहाली, अमृतसर, पटियाला, बठिंडा, जांलधर और लुधियाना में पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।

किसानों का खुदकुशी करना चिंताजनक
प्रदेश में किसानों की आत्महत्याएं करने के मामले पर बादल ने कहा कि यह बेहद चिंता का विषय है क्योंकि खेती अब मुनाफे वाला धंधा नहीं रहा। कृषि लागतों और फसलों के मूल्य तय करना केंद्र सरकार के हाथ में है और केंद्र को इस मसले के प्रति तुरंत कदम उठाने चाहिए। केंद्र, राज्य और किसानों की एक संयुक्त कमेटी बनाकर खेती मसलों और किसानों की खुशहाली के लिए प्रयास करे।
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