कैप्टन ने कहा कि जब हमने देश को प्रभुसत्ता संपन्न, समाजवादी, धर्म निरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाने और इसके नागरिकों को न्याय, समानता और स्वतंत्रता का भरोसा देने का एलान किया है तो भारत की आबादी के बड़े वर्ग को सुरक्षा से अलग कैसे छोड़ा जा सकता है।
नागरिकता को कानून से जोड़कर नागरिकता संशोधन बिल देश की नींव पर जोरदार हमला करेगा। अगर दूसरे देश भी ऐसे कानून लाने का फैसला कर लें तो वहां बड़ी संख्या में बसे भारतीयों का क्या बनेगा? उनके साथ कैसा सलूक होगा अगर वे देश फैसला लें कि उनके धार्मिक विश्वास के आधार पर भारतीयों की नागरिकता वापस ले ली जाए।
केंद्र को सभी दलों से सलाह करनी चाहिए थी
कैप्टन ने कहा कि संसद में बहुमत के बल पर इस बिल को पास कराने की बजाए केंद्र सरकार को इस मसले पर सभी पार्टियों के साथ सलाह करनी चाहिए थी और अगर यहां के लोगों के हित में ऐसे कानून की जरूरत महसूस होती तो इस पर आम सहमति पैदा करने की कोशिश की जाती।
मुसलमानों के पक्ष में उतरे सुखबीर
नागरिकता संशोधन कानून पर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) सुप्रीमो सुखबीर बादल मुसलमानों के पक्ष में आ गए हैं। वह किसी भी कीमत पर अल्पसंख्यकों की नाराजगी मोल लेना नहीं चाहते। सुखबीर का कहना है कि शिरोमणि अकाली दल ने बिल में मुस्लिम शब्द को शामिल करने की मांग की थी। सुखबीर के अनुसार भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। पूरे विश्व को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम शब्द का जिक्र बिल में होना चाहिए था। जो लोग बरसों पहले अपना घर छोड़ कर भारत में आए हैं, उनका घर जरूर भारत में होना चाहिए।