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पंजाब : ईवीएम के खिलाफ बनने लगा सियासी माहौल, विपक्ष के बाद अब कैप्टन ने बोली बड़ी बात 

Mon, 22 Mar 2021 11:48 AM IST
निवेदिता वर्मा हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • पंजाब में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से मतदान के खिलाफ राजनीतिक दल 
  • विपक्षी दल लगा चुके हैं ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप 
  • मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी किया ईवीएम से मतदान की व्यवस्था का विरोध 
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किया ईवीएम का विरोध। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के जरिए मतदान की व्यवस्था के खिलाफ पंजाब में सियासी माहौल गरमाने लगा है। विपक्षी दलों द्वारा ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप बार-बार लगाए जाते हैं। अब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी ईवीएम से मतदान की व्यवस्था का विरोध किया है। उनका कहना है कि ईवीएम में गड़बड़ी हो सकती है और इस गड़बड़ी को वे केंद्र सरकार के सामने भी रख चुके हैं। कैप्टन ने ईवीएम के जरिए मतदान का विरोध किया है।

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2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले राज्य की सियासत में उठे इस मुद्दे को लेकर यह आशंका भी बढ़ गई है कि यह साल खत्म होने तक ईवीएम का मुद्दा केंद्र और राज्य के बीच बड़े विवाद की शक्ल ले सकता है। माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा में बीते सप्ताह उठे इस मामले में शीतकालीन सत्र में सरकार या विपक्ष की ओर से प्रस्ताव लाया जा सकता है कि पंजाब में अगले चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं।

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मुख्यमंत्री ने पिछले सप्ताह जब अपनी सरकार की चार साल की उपलब्धियों का जिक्र किया तो पत्रकारों की तरफ से ईवीएम बनाम बैलेट को लेकर सवाल पूछा गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ईवीएम का विरोध करने वाले व्यक्तियों में से एक हैं, क्योंकि इनमें छेड़छाड़ हो सकती है। इसे उन्होंने एक समय चुनाव आयोग के सामने भी साबित कर दिया था। उन्होंने कहा कि जापान, स्वीडन और यूके जैसे विकसित देश भी ईवीएम का प्रयोग नहीं करते।

उल्लेखनीय है कि बीते सप्ताह स्थगित हुए पंजाब विधानसभा के सत्र में भी लोक इंसाफ पार्टी के नेता सिमरजीत सिंह बैंस ने यह मुद्दा उठाया था, जिस पर सदन में मौजूद सभी दलों के सदस्यों ने एक स्वर में ईवीएम से मतदान का विरोध जताया था। बैंस ने भारतीय संविधान की 7वीं अनुसूची की 14वीं और 28वीं धारा का जिक्र करते हुए बताया था कि ईवीएम या बैलेट से मतदान तय करना राज्य का अधिकार क्षेत्र है। इस पर सदन में मौजूद पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने न सिर्फ इस मुद्दे का समर्थन किया बल्कि स्पीकर से इस मामले पर ध्यान देने का आग्रह भी किया। 
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कांग्रेस के नवजोत सिंह सिद्धू के अलावा अकाली दल के सदस्यों और आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर सदन में अपना पक्ष भी रखा। नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा ने सदन में यह मांग भी रखी कि सदन में प्रस्ताव लाया जाए कि पंजाब में ईवीएम से चुनाव नहीं होंगे और अगले चुनाव पर्ची (बैलेट) से ही कराए जाएं।

पंजाब विधानसभा के स्पीकर भी पक्ष में
सिमरजीत बैंस ने पंजाब विधानसभा में बैलेट पेपर के जरिए मतदान की व्यवस्था का समर्थन करते हुए यह जानकारी दी थी कि महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर नाना पाटोले ने संविधान के अनुच्छेद 328 के तहत इस मामले में एक कमेटी का गठन किया था, जिसकी रिपोर्ट भी उन्हें मिल गई है।

इस कमेटी ने स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र विधानसभा को यह अधिकार है कि वह ईवीएम के बजाए बैलेट पेपर से मतदान की प्रक्रिया पूरी करे। बैंस ने सदन को यह भी बताया कि महाराष्ट्र विधानसभा के अगले सत्र में इस संबंध में प्रस्ताव आ रहा है। इस पर पंजाब विधानसभा के स्पीकर राणा केपी सिंह ने भी कहा कि वे महाराष्ट्र विधानसभा से इस बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करेंगे, उसके बाद आगे विचार होगा।
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