गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सरकारी अधिकारी /कर्मचारी आम तौर पर अधिक से अधिक 50 प्रतिशत रिवार्ड के लिए योग्य होंगे। गुप्ता ने खुलासा किया कि इस पॉलिसी के तहत योग्य व्यक्तियों की श्रेणी में मुखबिरों को शामिल किया जाएगा, जिनकी सूचना नशीले पदार्थों /साईकोट्रोपिक पदार्थों /नियंत्रित पदार्थों और एनडीपीएस एक्ट -1985 के चैप्टर 5-ए के अधीन ग़ैर-कानूनी तौर पर एक्वायर की गई जायदाद को जब्त करने का कारण बनती हो।
अन्य योग्य श्रेणी में राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारी /कर्मचारी शामिल होंगे जैसे पुलिस, वकील, भारत सरकार की एन्फोर्समेंट एजेंसियों के अफ़सर, जिन्होंने नारकोटिक्स ड्रग्स /साईकोट्रोपिक पदार्थ /नियंत्रित पदार्थ या एनडीपीएस एक्ट-1985 के अधीन सफल जांच की हो या मुकदमे की पैरवी सफलतापूर्वक की हो या एनडीपीएस एक्ट-1985 के चैप्टर 5-ए के अंतर्गत ग़ैर-कानूनी तौर पर एक्वायर की गई जायदाद को जब्त करने में सफलता हासिल की हो या पीआईटी एनडीपीएस एक्ट-1988 के अधीन एहतियाती हिरासत या कोई अन्य सफलता हासिल की हो, जो एडीजीपी /एसटीएफ और डीजीपी पंजाब द्वारा नगद रिवार्ड के योग्य समझी जाए।
ऐसे होगी इनाम के दावों की पड़ताल
ईनाम का दावा करने की विधि की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि हर जिला /यूनिट /विभाग उक्त दिशा-निर्देशों के अनुसार मामलों की पड़ताल के लिए संबंधित कमिश्नर ऑफ पुलिस /एसएसपी /यूनिट के प्रमुख /कार्यालय के प्रमुख के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति का गठन करेगा, जो रिवार्ड देने के लिए एडीजीपी /एसटीएफ को सिफारिशें करेगा। इन सिफारिशों की पड़ताल एसटीएफ हेडक्वार्टर में अधिकारियों की समिति करेगी, जो आगे इनको एडीजीपी /एसटीएफ या डीजीपी पंजाब के पास (एडीजीपी एसटीएफ द्वारा) रीवार्ड देने के लिए भेजेगी। एडीजीपी एसटीएफ एक लाख रुपये तक के इनाम की राशि मंजूर करने के लिए अधिकृत होंगे, जबकि एक लाख रुपये से अधिक की राशि डीजीपी द्वारा मंजूर की जाएगी।