कैप्टन अमरिंदर सिंह। (फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव को किसानों के खिलाफ एक और भड़काने वाला फैसला करार दिया है, जिसमें केंद्र ने आढ़तियों को किनारे करके किसानों को सीधे भुगतान करने का प्रस्ताव भेजा है। कैप्टन ने कहा कि यह कृषि कानूनों के मौजूदा संकट को और गहरा देगा।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार का बेरुखी भरा व्यवहार स्थिति को सुलझाने में मदद नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि यह मसला केंद्र और किसानों द्वारा ही सुलझाया जाने वाला है, जिसमें पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
पंजाब के बजट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे किसान और गरीब समर्थक करार दिया। कैप्टन ने कहा कि वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल की तरफ से विधानसभा में पेश किया गया विकास केंद्रित बजट समाज के सभी वर्गों की भलाई को सुनिश्चित करेगा। यह बजट राज्य सरकार का पंजाब के लोगों के प्रति किए वादे पूरे करने की ओर एक और कदम है। उन्होंने शगुन और पेंशन की राशि में विस्तार करने और राज्य के बुनियादी ढांचे और लिंक मार्गों के विकास का हवाला दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के मसले का सुखद ढंग से हल करने के बजाय उनके गुस्से को और भड़का रही है। एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) की तरफ से किसानों को ई-भुगतान के लिए जमीन रिकार्ड मांगने से स्थिति बद से बदतर होगी। पंजाब में 1967 से जांची-परखी व्यवस्था चल रही है, जहां किसान आढ़तियों से भुगतान लेते हैं। आढ़तियों और किसानों का बहुत पक्का रिश्ता है और वह कठिन समय में आढ़तियों से ही वित्तीय सहायता लेते हैं।