नितिन गडकरी के सामने उन्होंने पंजाब के प्रस्तावित हाईवे, लिंक सड़कों के साथ ही कई सड़कों को चौड़ा करने के लिए केंद्रीय मदद मांगी। इन सब प्रस्तावों के बारे में कैप्टन ने 2017 में अपनी सरकार बनने के छह माह बाद ही केंद्र को पत्र लिख दिया था। खास बात यह है कि उस समय भी केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ही थे।
तब भी कैप्टन से मुलाकात के दौरान गडकरी ने केंद्र के सहयोग का भरोसा दिलाया था और गुरुवार को भी गडकरी ने वही बात दोहराई है। वैसे जून 2017 में नाबार्ड ने पंजाब में 500 किमी की 71 सड़कों और 6 पुलों के निर्माण के लिए 266 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी देते हुए 213 करोड़ रुपये जारी किए थे।
केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के साथ 31000 करोड़ के सीसीएल के मामले पर भी कैप्टन की यह दूसरी बैठक रही। पिछली सरकार के समय भी पासवान ने भरोसा दिया था। हालांकि इस बार वे इस मामले में कैप्टन के साथ वित्त मंत्री के सामने बैठकर मसला हल कराने पर सहमत हुए हैं।
करतारपुर कॉरिडोर के लिए 500 करोड़ पर केंद्र चुप
मई माह के दौरान कैप्टन ने प्रधानमंत्री के नाम लिखे पत्र में मांग उठाई थी कि केंद्र नशे के समस्या से निपटने के लिए नेशनल ड्रग पॉलिसी बनाए। इस बारे में प्रधानमंत्री की ओर से तो पंजाब सरकार को कोई जवाब नहीं मिला लेकिन गुरुवार को अमित शाह ने कैप्टन को भरोसा दिलाया है कि केंद्र इस पर विचार कर रहा है।
इसी तरह, करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पंजाब सरकार द्वारा केंद्र से मांगी गई 500 करोड़ रुपये की मदद पर केंद्र चुप है। वैसे शुक्रवार को आवास और शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने सुलतानपुर लोधी के ढांचागत विकास के लिए 312 करोड़ के प्रोजेक्ट पर हामी भर दी है।