उन्होंने पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए डीजीपी दिनकर गुप्ता को तेजी से जांच पूरी करने के आदेश दिए। आरोपियों को सजा दिलाने के लिए अदालतों में जोरदार तरीके से पैरवी करने के लिए विशेष वकीलों की नियुक्ति की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस घटना पर राजनीति न करने का आग्रह भी किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने 92 पीड़ित परिवारों को सहायता राशि देने के लिए जिले के डीसी को दो करोड़ 92 लाख की राशि के चेक सौंपे। गौरतलब है कि इस हादसे में तरनतारन में 92, अमृतसर में 15 और गुरदासपुर में 14 लोग मारे गए।
मास्क पहने होने के कारण कैप्टन तक नहीं पहुंच रही थी प्रभावित परिवारों की आवाज
मुख्यमंत्री प्रभावित परिवारों के बीच 40 मिनट तक रहे। उन्होंने सुरक्षा के घेरे में खड़े प्रभावित परिवारों से दूर से ही बात की। इन लोगों को लोहे के बैरिकेड के पीछे कोरोना वायरस के बचाव के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार बिठाया गया था। प्रभावित परिवार और कैप्टन के बीच पांच फुट की दूरी थी। मास्क पहने होने के कारण जब इन लोगों की आवाज कैप्टन तक नहीं पहुंची तो उपस्थित अधिकारियों ने उन्हें ऊंचा बोलने को कहा। कैप्टन ने एक महिला से जानकारी हासिल की। बाद में कैप्टन मंच पर जाकर बैठ गए, जहां उनके सुरक्षा अधिकारी खुशी राम ने उनके हाथ सैनिटाइज करवाए।
इंसाफ दिलाने में कोई कसर नहीं छोडे़ंगे: जाखड़
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने प्रभावित परिवारों को विश्वास दिलाया कि मुख्यमंत्री उनको इंसाफ दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। अकाली-भाजपा के दस वर्ष के शासन काल में नशे के सौदागरों को राजनीतिक शरण दी गई, तभी इतना बड़ा कांड हुआ। यह आपराधिक लापरवाही का मामला है। आरोपियों को कड़ी सजा दिलवाने के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। सांसद जसबीर सिंह डिंपा ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रभावित परिवारों के दुख साझा करने के लिए पहुंचे हैं।