उन्होंने कहा कि धारा 125-ए को सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1925 में जोड़ा गया था। विधानसभा द्वारा इसे बहुमत से पास किया गया है। उन्होंने कहा कि विधेयक 26 जून 2023 को राज्यपाल के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया था लेकिन आज तक उस पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। यह पंजाब के लोगों की लोकतांत्रिक इच्छा का गला घोंटना है। उक्त चैनल के साथ एसजीपीसी का समझौता 23 जुलाई 2023 को समाप्त हो जाएगा। यदि विधेयक को तुरंत मंजूरी नहीं दी तो ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है कि दुनिया भर में लाखों श्रद्धालु श्री हरमंदिर साहिब से पवित्र गुरबानी का सीधा प्रसारण देखने से फिर से वंचित हो जाएंगे।
इससे दुनिया भर के सिखों की धार्मिक भावनाएं गंभीर रूप से आहत होंगी। भगवंत मान ने राज्यपाल से इस विधेयक पर जल्द से जल्द हस्ताक्षर करने का आग्रह किया, ताकि श्री हरमंदिर साहिब से सरब सांझी गुरबाणी का प्रसारण विभिन्न चैनलों और मीडिया के माध्यम से सभी के लिए स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराया जा सके।
राज्यपाल ने पीटीयू के वीसी को सरदार बेअंत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा
उधर, पंजाब सरकार की सिफारिश के विपरीत जाकर राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने एक और कदम उठाया है। अब उन्होंने पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सुशील मित्तल को सरदार बेअंत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी (गुरदासपुर) के वीसी की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है।
यह आदेश सरकार द्वारा राज्यपाल को स्टेट यूनिवर्सिटीज के वीसी पद से हटाने की शक्तियां सीएम को सौंपने का विधेयक पारित करने के बाद दिया है।
पता चला है कि तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग ने तकनीकी शिक्षा सचिव को सरदार बेअंत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी गुरदासपुर का अतिरिक्त प्रभार देने के लिए लिखा था, जिसे राज्यपाल ने खारिज कर दिया है। राज्यपाल ने सरदार बेअंत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी की धारा 9(5)का हवाला दिया।
याद रहे कि विधानसभा ने 20 जून को पंजाब विश्वविद्यालय कानून संशोधन विधेयक 2023 पारित किया था। इसकी कानूनी प्रक्रिया पर बाद में राज्यपाल ने सवाल उठाया था। हालांकि विधेयक को राज्यपाल की सहमति का इंतजार है। इससे पहले भी पंजाब की दो यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर नियुक्त करने को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री आमने-सामने आ चुके हैं।