1600 रुपये प्रति टन महंगी पड़ेगी कोयले की ढुलाई
मुख्यमंत्री ने इस बात पर नाराजगी जताई कि आरएसआर सिस्टम से कोयले के पहुंच मूल्य में तकरीबन 1600 रुपये प्रति टन की बड़ी वृद्धि होगी। इससे हर साल करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बर्दाश्त करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एमसीएल और पंजाब के बीच रेल-मार्ग द्वारा दूरी तकरीबन 1900 किलोमीटर है, जबकि प्रस्तावित आरएसआर माध्यम से रेल मार्ग तकरीबन 1700-1800 किलोमीटर के साथ-साथ परादीप और मुंदरा के बीच तकरीबन 4360 किलोमीटर का अतिरिक्त समुद्री सफर पड़ेगा।
इस कारण कोयले की कुल पहुंच लागत का 60 प्रतिशत तो ढुलाई की ही लागत हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस पर भी रोष जताया कि 1400 किलोमीटर से ज्यादा दूर स्थित ताप बिजली घरों को रेलवे द्वारा किराए में दी गई राहत 31 दिसंबर, 2021 को खत्म होने के बाद से बढ़ाई नहीं गई, जिसके चलते रेल भाड़े में एकदम वृद्धि हुई है। मान ने कहा कि आरएसआर माध्यम से कोयले की ढुलाई के दौरान लादने और उतारने के लिए कई साधन लगेंगे, जिससे ट्रांजिट नुकसान 0.8 से बढ़कर 1.4 प्रतिशत हो जाएगा। इसके अलावा ढुलाई समय रेल माध्यम के 4-5 दिन के मुकाबले तकरीबन 25 दिन का हो जाएगा।