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HSGPC के मुद्दे पर ये बोले मुख्यमंत्री बादल

Wed, 16 Jul 2014 12:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब के मुख्यमंत्री और शिअद विधायक दल के नेता प्रकाश सिंह बादल की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई पार्टी विधायकों की बैठक में हरियाणा सरकार द्वारा वहां के गुरुद्वारों के प्रबंध के लिए अलग कमेटी कायम करने के लिए बनाए गए कानून को सिखों के धार्मिक मामलों में प्रत्यक्ष दखलंदाजी करार दिया।
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इसकी निंदा करते हुए बैठक में सर्वसम्मति से पारित किए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि हरियाणा की कांग्रेस सरकार का यह कदम पूरी तरह गैर वैधानिक व खालसा पंथ को बांटकर इसकी धार्मिक और राजनीतिक शक्ति को समाप्त करने कांग्रेस की लंबे समम से चली आ रही कोशिशों का हिस्सा है।

खड़ा हो गया है संवैधानिक संकट

विधायक दल ने कहा कि हरियाणा द्वारा उठाए गए इस गैर-संवैधानिक कदम से संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। इसीलिए केंद्र सरकार को इस संवेदनशील मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।

हरियाणा सरकार के इस कदम को इस क्षेत्र में बहुत अधिक कोशिशों के बाद लाई गई अमन-शांति एव भाईचारक सांझ के लिए बड़ा खतरा बताते हुए विधायक दल ने कहा कि हरियाणा की सरकार ने वहां के सिखों द्वारा एसजीपीसी के आम चुनावों में प्रकट की गई राय की भी तौहीन की है।

विधायक दल के प्रस्ताव में कहा गया कि हरियाणा सरकार ने देश के  संविधान में की गई व्यवस्थाओं का उल्लंघन करने वाला बिल पास करके संविधान की भी तौहीन की है।

बिल मंजूर होते ही बढ़ जाएगी गुरुद्वारों की सुरक्षा

हरियाणा विधानसभा में एचएसजीपीसी बिल पास होने के बाद राज्यपाल की अनुमति का इंतजार किया जा रहा है। इस बीच हरियाणा पुलिस की परेशानियां बढ़ गई हैं। राज्य भर से मिल रहे इनपुट के बाद पुलिस ने राज्य के गुरुद्वारों की संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियां शुरू कर दी है।

हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक विधानसभा में बिल पारित होने के बाद अतिशीघ्र राज्यपाल इस पर मोहर लगा सकते हैं। राज्य के गुरुद्वारों और उनकी संपत्तियों पर को हिंसा न हो इसके लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं।

शुक्रवार को हरियाणा पुलिस के डीजीपी एसएन वशिष्ठ इस आशंका से स्वयं विधानसभा के बाहर और अंदर का जायजा लेने पहुंचे थे। शनिवार को आला अधिकारियों ने सूबे के मुखिया को भी इस बात की सूचना दे दी है।

करीब 52 गुरुद्वारों को सुरक्षा दी जाएगी

विधानसभा वेल में भी इंस्पेक्टर स्तर के दो अधिकारियों को तैनात किया गया था। हरियाणा पुलिस को खुफिया तंत्रों से जो इनपुट मिला है उसके मुताबिक निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे मामलों में हिंसा न हो इसका ध्यान रखना जरूरी है। जिसके लिए पुलिस पहले से ही मौजूद है।

राज्य के करीब 52 ऐसे गुरुद्वारों के आसपास पुलिस ने सुरक्षा इंतजाम पूरे करने शुरू कर दिए हैं। इनमें से आठ गुरुद्वारे मुख्य हैं। हरियाणा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि इस मामले में पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद है। हम किसी को कानून का उल्लंघन नहीं करने देंगे। कानून व्यवस्था में हस्तक्षेप की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।

सिखों की मतदाता सूचियां भी तैयार की जाएंगी

गुरुद्वारा चुनाव के लिए प्रत्येक वार्ड के मतदाताओं की फोटोयुक्त मतदाता सूचियां तैयार की जाएंगी जिसमें वोटर के रूप में पंजीकरण के लिये पात्र सभी व्यक्तियों के नाम दर्ज किए जाएंगे।

एक व्यक्ति केवल एक वार्ड की मतदाता सूची में ही अपना नाम दर्ज करवा सकता है। मतदाता सूची का गुरुद्वारा चुनाव आयोग द्वारा पंजीकरण करवाया जाना अनिवार्य है।

18 वर्ष से अधिक आयु के सिख मतदान के लिये योग्य होंगे। अधिनियम के तहत हरियाणा सिख गुरुद्वारा न्यायिक आयोग का गठन भी किया जाएगा। जिसमें तीन सदस्य शामिल होंगे।

महिलाओं और हर वर्ग को मिलेगा कमेटी में दर्जा

कमेटी में राज्य के विभिन्न वार्डों से 40 सदस्यों का चयन किया जाएगा। कमेटी के चयनित सदस्यों द्वारा नौ सदस्य सहयोजित किए जाएंगे।

जिनमें से दो सिख महिलाएं, अनुसूचित जाति एवं पिछडे़ वर्गों से संबंधित तीन सदस्य, सामान्य जाति से सिख पंथ का व्यापक ज्ञान रखने वाले दो सदस्य और दो सदस्य प्रदेश की पंजीकृत सिंह सभाओं के अध्यक्षों से सहयोजित किए जाएंगे।

इस तरह से इस कमेटी में कुल 49 सदस्य होंगे। कमेटी के सदस्य के रूप में निर्वाचन या सहयोजन के लिए वे व्यक्ति पात्र नहीं होंगे जिनकी आयु 25 वर्ष से कम है।
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एचएसजीपीसी बिल में किए गए हैं सभी प्रावधान

हरियाणा सरकार ने विधानसभा में पारित बिल में एचएसजीपीसी कार्यप्रणाली का तानाबाना बुन दिया है।

बिल के मुताबिक हरियाणा सिख गुरुद्वारा (प्रबंधन)अधिनियम, 2014 लागू होने से हरियाणा के पवित्र सिख पूजा स्थलों का उचित प्रबंधन, नियंत्रण, वित्तीय प्रबंधन सुधार को प्रभावी और स्थाई रूप से हरियाणा के सिखों के नियंत्रण में लाया जा सकेगा।

इस समय सिख गुरुद्वारों का नियंत्रण सिख गुरुद्वारा अधिनियम 1925 और उसके तहत बनाए गए नियमों एवं विनियमों के प्रावधानों द्वारा किया जा रहा है।
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