चंडीगढ़ में वित्त आयोग की बैठक
मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार को पिछली अकाली -भाजपा सरकार से 2.10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज विरासत में मिला है, जिससे पंजाब राजस्व घाटे वाला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि पिछले वित्त आयोग ने राजस्व घाटे वाले राज्यों में से पंजाब को बाहर कर दिया था, हालांकि इसे 12वें वित्त कमीशन ने शामिल किया था।
किसानी कर्ज में केंद्र से सहयोग की जरूरत
कृषि कर्ज राहत के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने 10 लाख छोटे व सीमांत किसानों के लिए 8000 करोड़ रुपये का पैकेज पहले ही घोषित किया हुआ है लेकिन केंद्र से व्यापक पैकेज और सहायता की जरूरत है। कैप्टन ने आयोग को मक्का और गन्ने की कीमत में घाटे के लिए सहायता उपलब्ध करवाने की अपील की जो क्रमश: 12,350 करोड़ और 300 करोड़ तक रुपये बनता है।
केंद्रीय स्पांसर स्कीमों में पंजाब का हिस्सा 2 फीसदी करने की मांग
केंद्रीय स्पॉंसर स्कीमों के डिवोल्वड (सुपुर्दगी) फंडों में पंजाब का हिस्सा 1.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत करने की मांग की जो पिछले 40 वर्षों के दौरान 2.45 प्रतिशत से घटकर 1.57 प्रतिशत रह गया है।
राज्य में भूजल के गिरते स्तर के कारण पैदा हो रही गंभीर स्थिति पर मुख्यमंत्री ने आयोग से पंजाब के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में मुकम्मल जल प्रबंधन के लिए 12000 करोड़ रुपये का अनुदान मांगा। मुख्यमंत्री ने नदियों की सफाई प्रोग्राम के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये की मांग की जबकि भूजल में नहरी वृद्धि और वृक्षों के जरिये सुधार के लिए भी 3682 करोड़ रुपये की अनुदान की मांग की।
नशा पीड़ितों के पुनर्वास के लिए मांगे 300 करोड़
कैप्टन ने आयोग के ध्यान में लाया कि नशों की समस्या से राज्य में बेरोजगारी भी अमरबेल की तरह बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब में बेरोजगारी की दर 16.60 प्रतिशत है जो कि केंद्र की 10.20 प्रतिशत से भी अधिक है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा चलाए ओट क्लीनिकों के द्वारा नशा पीड़ितों के पुनर्वास और मुख्य धारा में लाने के लिए 300 करोड़ की अनुदान की भी मांग की।
बिजली व सड़कों के लिए 12217 करोड़ की मांग
कैप्टन ने आयोग से मांग की कि पंजाब को बिजली और सड़क क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे के लिए क्रमश: 5500 करोड़ और 6719 करोड़ रुपये का अनुदान जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि विभिन्न केंद्रीय स्कीमों के अंतर्गत राज्य को इन क्षेत्रों के लिए न तो कोई मुख्य अनुदान मिला है और न ही इनके रखरखाव के खर्चों का कोई उपबंध है। मुख्यमंत्री ने कैंसर की रोकथाम के लिए भी 100 करोड़ रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों व शहरों के आसपास सीवरेज सुविधाओं के लिए 505 करोड़ की मांग की।