टवीट् के साथ एक वीडियो अपलोड कर सिरसा ने कहा कि यह बोलना हमारी मजबूरी है कि तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ में सरकार ने दखलंदाजी करनी शुरू की। श्री पटना साहिब में एनडीए की तरफ से तीन मेंबर बनाकर वहां कब्जे की कोशिश की गई। अब श्री हजूर साहिब में सरकार अपना प्रधान बनाना चाहती है। हमारे लिए गठबंधन मायने नहीं रखता। गुरुद्वारे का प्रधान कौन बनेगा, यह हक सिखों का है, सरकार का नहीं।
किसी भी सूरत में सरकार हमारे गुरुद्वारों में दखल नहीं दे सकती। हमें गठबंधन नहीं, न ही कुर्सियां चाहिए, हम गुरुद्वारों पर सरकार की दखलंदाजी नहीं चाहते। हमारे लिए धार्मिक स्थान की अहमियत है। सरकार सिखों के गुरुद्वारे के लिए बने एक्ट को खुद ही संशोधन कर अपनी मनमर्जी के प्रधान लगाने जा रही है, जिसका डटकर विरोध किया जाएगा।
पिछले एक सप्ताह में अकाली दल व भाजपा के बीच काफी खटास पैदा होती दिख रही है। केंद्र सरकार की ओर से राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा को पद्मश्री से नवाजा गया, जबकि उसी दिन ढींढसा ने कहा कि अकाली दल तभी खड़ा हो सकता है, अगर इसकी लीडरशिप सुखबीर के स्थान पर किसी अन्य के हाथ में दी जाए।
इतना ही नहीं, एसजीपीसी को बादल परिवार के चंगुल से छुड़ाने का एलान करने वाले सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट एचएस फूलका को भी पद्मश्री से नवाजा गया। चौंकाने वाली बात रही कि सुखबीर बादल व हरसिमरत कौर बादल ने अपनी पार्टी के सीनियर नेता सुखदेव सिंह ढींढसा को पद्मश्री से नवाजे जाने पर सार्वजनिक तौर पर बधाई तक नहीं दी।