राहत एवं बचाव कार्य में जुटी एनडीआरएफ
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आईआईटी के निदेशक की विनती को स्वीकार करते कैप्टन ने अपने मुख्य प्रमुख सचिव को साझे तौर पर एक योजना बनाने के लिए कहा जिससे भविष्य में बाढ़ से इस कैंपस को किसी तरह के नुकसान को टालने के लिए ठोस और प्रभावशाली ड्रेनेज व्यवस्था यकीनी बनाया जा सके।
ड्रेनेज विभाग के चीफ इंजीनियर ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि ब्यास और रावी नदी की सारी स्थिति काबू में है। सतलुज दरिया के साथ लगते इलाकों और फिरोजपुर में हरीके हेडवर्क्स में दरिया के बहाव वाले इलाकों में खतरा मंडरा रहा है।
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हेडवर्क्स का दौरा करने के बाद गांव शामपुरा में स्थिति का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री ने वहां झुग्गी-झोंपड़ी वालों की तकलीफें जानीं। कैप्टन ने कहा कि जिला प्रशासन सेहत विभाग के साथ तालमेल करके सेहत जांच कैंप भी लगाएगा। उन्होंने पशु पालन विभाग को हिदायत की कि जरूरतमंदों को पशुओं के लिए सेहत सेवा मुहैया कराने के अलावा उनके लिए चारे की सप्लाई का उचित प्रबंध किए जाएं।
गांव खैराबाद में भी उन्होंने सड़क की हालत और टूटे हुए बुधकी नदी के बांध का जायजा लिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री के साथ विधानसभा के स्पीकर राणा केपी सिंह, तकनीकी शिक्षा और सैर सपाटा मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी, श्री आनंदपुर साहिब के सांसद मनीष तिवारी और रोपड़ से विधायक अमरजीत सिंह सन्दोआ, जिला कांग्रेस कमेटी के प्रधान बरिंदर सिंह ढिल्लों के अलावा मुख्यमंत्री के मुख्य प्रमुख सचिव सुरेश कुमार, प्रमुख सचिव तेजवीर सिंह, विशेष प्रमुख सचिव गुरकिरतपाल सिंह, डिविजन कमिश्नर राहुल तिवाड़ी, डिप्टी कमिश्नर सुमित जारंगल और जिला पुलिस प्रमुख स्वप्न शर्मा उपस्थित थे।
डीसी ने सीएम को बताया कि मूसलाधार बारिश के कारण रविवार को रोपड़ हेडवर्क्स से दो लाख 50 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके अलावा स्वां नदी (90,000 क्यूसेक), सिरसा नदी (60,000 क्यूसेक) बुधकी नदी (20,000 क्यूसेक) दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने पुलिस, राष्ट्रीय आफत राहत फोर्स और गैर-सरकारी संस्थाओं के सहयोग के साथ 45 गांवों में से 600 से अधिक परिवारों को सुरक्षित बचाया।
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फिरोजपुरः हरिके हैड में पहुंचा 1.05 लाख क्यूसेक पानी
सतलुज नदी में आई बाढ़ के चलते जिला प्रशासन ने मक्खू, जीरा व आसपास के इलाकों में सेना के 240 जवान मोटरबोट के साथ तैनात किए हैं, जबकि हुसैनीवाला बार्डर की तरफ बसे ग्रामीणों की मदद के लिए एनडीआरएफ तैनात है। हुसैनीवाला की तरफ बह रहे सतलुज दरिया के उस पार लगभग 17 गांव बसे हैं।
डीसी चंद्र गैंद ने बताया कि प्रशासन ने संभावित बाढ़ जैसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है। करीब 52 गांव को खाली करवाने के आदेश हैं, जिसमें से काफी गांव खाली हो चुके हैं। सतलुज नदी से होते हुए हरिके हैड तक 1.05 लाख क्यूसेक पानी पहुंच गया है, जिसे रिलीज किया जा रहा है।
इसी तरह सिंचाई विभाग और नहरी विभाग के अधिकारियों को रेत से भरी बोरियां तैयार रखने के लिए कहा गया है। डीसी ने दोनों विभागों को निर्देश दिए हैं कि जहां भी बांध में कोई दरार की सूचना मिलती है, वहां तुरंत इन बोरियों के जरिए लीकेज को बंद करने का काम किया जाए। उन्होंने सभी संभावित क्षेत्रों में रेत से भरी बोरियों की ट्रालियां तैयार रखने के निर्देश जारी किए हैं।
नंगलः भाखड़ा डैम का जलस्तर खतरे के निशान के पार
हिमाचल के ऊपरी क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश व बादल फटने की घटनाओं का सीधा असर भाखड़ा डैम के पीछे बनी गोबिंद सागर झील में दिख रहा है। झील में बीबीएमबी मैनेजमेंट के अनुमान से कहीं अधिक पानी की आमद के चलते डैम का जलस्तर खतरे के निशान 1680 फुट से 1681 फुट के पार जा पहुंचा है।
भाखड़ा डैम के तेजी से बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बीबीएमबी मैनेजमेंट ने चारों फ्लड गेटों से दो गुणा पानी छोड़ना शुरू कर दिया है, जिससे बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।
सूत्रों की माने तो प्रशासन द्वारा सतलुज नदी के किनारे बसे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। बीबीएमबी मैनेजमेंट द्वारा दर्शाए आंकड़ों के अनुसार सोमवार सुबह 11 बजे तक भाखड़ा डैम में पानी की आमद एक लाख 30 हजार 973 क्यूसेक दर्ज की गई। इससे जलस्तर 1681.08 फुट तक जा पहुंचा।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर सीएम
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पानी के बढ़ते स्तर को देखते हुए बीबीएमबी मैनेजमेंट द्वारा यहां बीते दिन तक फ्लड गेटों के माध्यम से 19000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था उसमें वृद्धि करते हुए 40 हजार क्यूसेक कर दिया है, जबकि टरबाइनों के माध्यम से 34728 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
नंगल डैम से निकलने वाली नंगल हाइडल, श्री आनंदपुर साहिब हाइडल और सतलुज दरिया उफान पर है। नंगल डैम से नंगल हाइडल में 12350, श्री आनंदपुर साहिब हाइडल नहर में 10150 जबकि सतलुज दरिया में 52 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
प्रशासन ने किया बाढ़ ग्रस्त गांवों का दौरा
नंगल डैम से सतलुज नदी में छोड़े जाने वाले पानी के चलते श्री आनंदपुर साहिब के गांवों चंदपुर, हरीयाल, लोधीपुर इत्यादि गांवों का कमिश्नर रूपनगर राहुल तिवारी, उपायुक्त सुमित जारंगल और एसडीएम कन्नू गर्ग ने दौरा कर हालात का जायजा लिया।
भाखड़ा डैम से छोड़ा पानी नहीं, स्वां नदी व अन्य खड्ढों का पानी बन रहा बाढ़ का कारण
भाखड़ा डैम से छोड़े गए पानी से कहीं बाढ़ के हालात नहीं बने और न ही इससे कोई नुकसान हुआ है। यह दावा सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में बीबीएमबी के मुख्य अभियंता अश्वनी अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल-पंजाब में हुई मूसलाधार बारिश के कारण स्वां नदी, सिरसा नदी और विभिन्न खड्ढों का पानी ही बाढ़ का कारण बना है।
उन्होने कहा कि बीबीएमबी मैनेजमेंट ने फ्लड गेटों के माध्यम से मात्र 19 हजार क्यूसेक ही पानी छोड़ा था जो बारिश के दिनों में आम बात है। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी मैनेजमेंट पल-पल की नजर बनाए हुए है, किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हिमाचल से आने वाली स्वां नदी में इस समय 76636 क्यूसेक पानी आ रहा है जो पंजाब में सतलुज नदी में समाने के साथ ही बाढ़ का कारण बनता है।
साल 1988 के बाद एक बार फिर सतलुज नदी अपने रौद्र रूप में दिख रही है। रविवार रात को सतलुज नदी में गांव भोलेवाल में 60 फुट की दरार पड़ गई। इससे पूरा गांव 5 फुट तक पानी में समा गया। लोग किसी तरह निकल कर अपनी जान बचाने में कामयाब रहे। इसके साथ गांव आहलोवाल, माजरा कला और खेहरा बेट में दरिया का पानी घुस चुका है। यहां भी चार फुट तक पानी भर चुका है।
पानी से जहां घरों को नुकसान हुआ है, वही खेतों में खड़ी कई एकड़ धान की फसल भी बर्बाद हो चुकी है। हालात को देखते प्रशासन ने बचाव के लिए एनडीआरएफ टीम को गांवों में भेज दिया है। दोपहर बाद रेवेन्यू मिनिस्टर सुखविंदर सिंह भी बाढ़ प्रभावित एरिया का जायजा लेने के लिए पहुंचे।
उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को बाढ़ पीड़ितों की हर संभव मदद करने के लिए आदेश जारी किए। बता दें कि साल 1988 में सतलुज नदी में आए पानी से शहर के कई एरिया डूब गए थे। इस समय भी सतलुज नदी के विकराल रूप को देख लोगों को वही पुरानी याद आ रही है।
सतलुज नदी में उफान के कारण शहर से गुजरने वाले बुड्ढा दरिया भी खतरा बन चुका है। रविवार देर रात बुड्ढा दरिया का पानी आगे जाने की जगह पीछे की तरफ आ गया। बताया जा रहा है कि सतुलज से लगभग 700 क्यूसेक पानी वापस शहर की तरफ आ गया। इससे निगम के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद हो गए।
वहीं एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर ने बताया कि लुधियाना में तीन टीमें राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं। 5-6 टीमें स्टैडबाई हैं। सुबह से टीम ने लुधियाना के भोलेवाल कदीम गांव में 40 लोगों और 8 जानवरों का रेस्क्यू किया। हालांकि अभी भी गांव में करीब 150 लोगों को रेस्क्यू का इंतजार हैं।
देर रात को निगम के सभी अफसरों को बुड्ढा दरिया के संवेदनशील प्वाइंट पर तैनात कर दिया गया है। बुड्ढा दरिया के साथ बसे मोहल्लों में पानी भरने का खतरा पैदा हो चुका है। कुंदन पुरी के पास दरिया का पानी किनारों को छूने लगा है। निगम मिट्टी और कचरे से किसी तरह किनारों को मजबूत करने में जुटा है।
नदी के आसपास स्कूल बंद करने के आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी ने सतलुज नदी के आसपास चल रहे सरकारी और निजी स्कूलों के प्रबंधकों को अलर्ट जारी करते स्कूल बंद रखने के लिए कहा है। सभी स्कूल प्रबंधकों के नाम पर भेजे गए पत्र में कहा गया है कि फिलहाल बाढ़ आने की संभावना है।
स्कूल प्रबंधक अपने स्तर पर बंद करने का फैसला ले सकते है। यह देख ले कि किसी हालत में किसी छात्र को नुकसान नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा कुछ हुआ तो इसकी सीधे जिम्मेदारी प्रबंधक की होगी।
सतलुज में जलस्तर बढ़ने के कारण पानी बुड्ढा दरिया में बैक कर गया था। इसलिए भट्टियां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को बंद कर दिया गया है। वही शहर से पानी कम करने के लिए निगम ने सभी डाइंग को बंद रखने के निर्देश जारी किए है।
इसके अलावा लोगों को भी वाटर सप्लाई कम कर दी गई है। ताकी बुड्ढा दरिया में पानी कम जाए। फिलहाल बुड्ढा दरिया पानी तेजी से गुजर रहा है, जैसे सतलुज का स्तर कुछ कम होगा। बुड्ढा दरिया में भी पानी का स्तर कम हो जाएगा। - राजिंदर सिंह, एसई नगर निगम
पटियालाः नाभा के दर्जनों गांवों के खेतों में पानी भरा
नाभा विधानसभा क्षेत्र में सरहंद चौ में ज्यादा पानी आने कारण दर्जनों गांव प्रभावित हुए हैं। खेतों में पानी भर गया है, जिससे किसानों की फसलें बर्बादी के किनारे पहुंच गई हैं। नाभा हलके के प्रभावित गांवों में रामगढ़, मांगेवाल, लोपे, भोड़े, घणीवाल, मल्लेवाल, ढींगी, सुक्खेवाल, सालूवाल, कौल, गलवट्टी, भीलोवाल, तुंगां, हिंमतपुरा और छींटांवाला आदि शामिल हैं।
किसानों के चेहरों पर निराशा है। सोमवार को कैबिनेट मंत्री व हलके के विधायक साधु सिंह धर्मसोत ने प्रभावित गांवों का दौरा करके किसानों के साथ बातचीत की। साथ ही पानी के प्राकृतिक बहाव में रुकावटें तुरंत दूर करने की हिदायतें भी जारी कीं।
सतलुज नदी के निकट बसे 33 गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नकोदर व लोहियां के कुल 33 गांवों में सतलुज का पानी घुस आया है। डीसी वरिंदर कुमार शर्मा ने एसएसपी नवजोत सिंह माहल के साथ सोमवार को दिन भर सतलुज के निकट गांवों का दौरा किया और लोगों को गांव खाली करने के लिए प्रेरित किया। महितपुर में बाढ़ में फंसे छह लोगों की जान भी बचाई गई।
अतिरिक्त डिप्टी कमिशनर कुलवंत सिंह ने बताया कि 42 तैराकी विशेषज्ञों और स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स को रोपड़ हेड वर्क्स से रविवार को 2,23,746 क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर नकोदर सब डिवीजन में तैनात किया गया था। बचाओ सेंटर पहले ही सब डिविजन में स्थापित किये जा चुके हैं, जहां भोजन और रहने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा बचाओ सेंटरों में इलाज के लिए मेडिकल टीमें भी 24 घंटे के लिए तैनात की गई हैं।
सोमवार को फिल्लौर में बांध टूटने के बाद सतलुज दरिया का पानी कई गांवों में घुस गया है। इससे सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई है। पुलिस, एनडीआरएफ की टीमों और सेना के जवानों ने बचाव अभियान शुरू कर दिया है। एसएसपी देहात नवजोत सिंह माहल खुद एनडीआरएफ की टीमों के साथ बचाव अभियान की अगुवाई कर रहे हैं।