पंजाब मंत्रिमंडल में बैठक में बुधवार को कई फैसले लिए गए, वहीं एक्साइज एक्ट-1914 (संशोधन) बिल, 2017 के प्रारूप की धाराओं में संशोधन को मंजूरी दी गई। साथ ही इसे कानूनी रूप देने के लिए विधानसभा के आगामी सत्र में पेश करने को हरी झंडी दे दी। यह फैसला मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान लिया गया।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि एक्ट की धारा 72, 78 और 81 में संशोधन के बाद अब राज्य में शराब की तस्करी पर काबू पाया जा सकेगा। अब 750 एमएल की विदेशी शराब की 12 से अधिक बोतलें पंजाब में लाना अब गैर जमानती जुर्म माना जाएगा। इसके अलावा विदेशी शराब की तीन पेटियों से अधिक शराब की पेटियां ले जाने वाली गाड़ियों को जब्त कर लिया जाएगा। यह जब्त गाड़ियां उनमें लदी शराब की कीमत के बराबर नकदी या बैंक गारंटी दिए जाने पर ही छोड़ी जाएंगी।
शराब के दाम घटाने पर नहीं हुई चर्चा
हाल ही में पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह ने एक्साइज ड्यूटी के जरिए राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से सूबे में शराब के दाम घटाने की बात कही थी। उनका कहना था कि शराब के दाम कम होने से पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी रुकेगी और सूबे में ही शराब की बिक्री होने से सरकार के राजस्व में इजाफा होगा। बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान, पंजाब में शराब तस्करी रोकने के लिए एक्साइज एक्ट-1914 की विभिन्न धाराओं में संशोधन किया गया लेकिन शराब के दाम घटाने को लेकर कोई विचार नहीं रखा गया।
कैबिनेट की बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसले भी हुए
अमरिंदर सिंह
- फोटो : SELF
- पंजाब लैंड रेवेन्यू एक्ट 1972 की धारा 38 (ए) में संशोधन
- मुकदमेबाजी रोकने को सहकारी सभाएं एक्ट में कई संशोधन
- कृषि भूमि के अन्य उपयोगों के लिए किया एक्ट में संशोधन
- कर्जदार किसानों की मदद को बढ़ाई ग्रामीण विकास फीस
पिछड़ी श्रेणियों को आरक्षण लाभ के लिए आय सीमा बढ़ी
पंजाब सरकार ने अन्य पिछड़ी श्रेणियों/पिछड़ी श्रेणियों के लोगों को आरक्षण का लाभ देने के लिए आय सीमा को छह लाख रुपये वार्षिक से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया गया है। इस संबंध में बुधवार को अधिसूचना जारी कर दी गई है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि सरकार ने अन्य पिछड़ी श्रेणियों/पिछड़ी श्रेणियों को राहत देते हुए आरक्षण के दायरे में सामाजिक तौर पर उन्नत (क्रीमीलेयर) व्यक्तियों को बाहर रखने के लिए आय सीमा के मापदंड में संशोधन किया गया है।
प्रवक्ता के अनुसार, उन व्यक्तियों के पुत्र-पुत्री, जिनकी लगातार तीन साल तक वार्षिक आमदनी 8 लाख रुपये या उससे अधिक है, वे सामाजिक तौर पर उन्नत (क्त्रस्ीमीलेयर) दायरे में आते हैं और अन्य पिछड़ी श्रेणियों/पिछड़ी श्रेणियों के आरक्षण के लाभ के हकदार नहीं होंगे।
कर्जदार किसानों की मदद को ग्रामीण विकास फीस में इजाफा
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में, प्रदेश में कृषि विविधता को बढ़ावा देने और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाते हुए कर्ज में दबे किसानों को राहत देने के उद्देश्य से विभिन्न संशोधनों को मंजूरी दी गई। मंत्रिमंडल की बैठक के सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि विधानसभा के आगामी सत्र में इन सभी संशोधनों को लेकर बिल पेश किए जाएंगे।
प्रवक्ता ने बताया कि बैठक में यह फैसला लिया गया कि ग्रामीण विकास फीस की दर 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत की जाए, जिसके लिए ‘द पंजाब रूरल डेवलपमेंट एक्ट-1987 की धारा 51(1) और कर्ज में डूबे किसानों को राहत मुहैया करवाने के लिए ‘द पंजाब एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्किट एक्ट-1961 की धाराओं 23 (1), 26 और 28 में संशोधन किया जाए। प्रवक्ता ने बताया कि पहला संशोधन वस्तुओं का उत्पादन और उत्पादकों के हित सुरक्षित करने के अलावा ग्रामीण विकास फंड को ऋण के बोझ के नीचे दबे किसानों को राहत मुहैया करवाने के लिए प्रयोग करने में सहायक होगा।
उन्होंने बताया कि एकत्रित की गई मार्केट फीस खेती उत्पादन के बेहतर मंडीकरण और इसके बुनियादी ढांचे के विकास व रखरखाव लिए ख़र्च की जाएगी। फिलहाल इस फीस को मक्का सुखाने वाली मशीनों, कृषि उत्पादन की दर्जाबंदी, पके फलों को कोल्ड स्टोरेज में रखने के अलावा लिंक सड?ों की मुरम्मत के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘द पंजाब एग्रीकल्चर प्रौडयूस मार्किट एक्ट -1961’ में संशोधन कर्ज तले दबे किसानों की मुश्किलों का हल निकालने के साथ-साथ किसानों को उत्पादन का बेहतर मूल्य देने के लिए सहायक होगा।
केले, अमरूद, अंगूर के बाग नहीं, अब खेत होंगे
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
एक अन्य फैसले में मंत्रिमंडल ने बुधवार को पंजाब लैंड रेवेन्यू एक्ट-1972 की धारा 38 (ए) में संशोधन करके पंजाब विधानसभा के आगामी सत्र के दौरान बिल पेश करने की सहमति दे दी है। इसके तहत केले, अमरूद और अंगूरों की काश्त के लिए भूमि को बागों की परिभाषा से बाहर निकाल लिया जाएगा जो किसानों को गेहूँ धान के फसली चक्कर में से बाहर निकाल कर फलों और सब्जियों की पैदावार के प्रति प्रोत्साहित किया जा सकेगा।
इस संशोधन से अमरूद, केले और अंगूरों की काश्त करने वाले किसान या मुज़ारे को 20.5 हेक्टेयर तक भूमि रखने का कानूनी हक मिल जाएगा। मंत्रिमंडल ने पंजाब लैंड रिफार्म एक्ट-1972 की धारा 27 (जे) में संशोधन करने का फैसला किया है जिससे खेती वाली भूमि जिसको सूबे के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए मकान, उद्योग, विशेष आर्थिक जोन जैसे बुनियादी ढांचों के प्रोजेक्टों, पर्यटन इकाइयों (होटल व रिजॉर्ट), सार्वजनिक सुविधा, गोदाम, व्यापारिक, सांस्कृतिक, मनोरंजन, खेल, धार्मिक संस्था आदि जैसे गैर कृषि उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया गया है, को इस एक्ट के घेरे में से बाहर रखा जा सके।
सहकारी सभाएं एक्ट में कई संशोधनों को दी मंजूरी
कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : File Photo
सहकारी सभाओं में अनावश्यक मुकदमेबाज़ी को रोकने के लिए पंजाब मंत्रिमंडल ने पंजाब राज्य सहकारी सभाएं एक्ट-1961 में कई संशोधनों को बुधवार को मंजूरी प्रदान कर दी। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इन संशोधनों से सहकारी सभाओं के कामकाज में कुशलता और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। मंत्रिमंडल के फैसले के तहत उक्त एक्ट में संशोधित की गई धाराएं इस प्रकार हैं-
धारा-13 में संशोधन: इसके अंतर्गत सहकारी सभाओं का विभाजन और विलय का उपबंध किया गया है। इसके अनुसार रजिस्ट्रार एक से अधिक सभाओं के विलयों के प्रस्तावित आदेशों के संबंध में संबंधित सभाएं या देनदार अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं। यह ऐतराज़ करने वाली सहकारी सभाओं को रजिस्ट्रार के फ़ैसले के विरुद्ध सरकार के पास अपना पक्ष पेश करने के लिए एक और अवसर देने के लिए यह संशोधन किया गया है।
धारा 19 (2) में संशोधन : इसके अनुसार कोई सभा अपने समिति सदस्य को एक और सभा जिसकी वह सदस्य है, के कामकाज में वोट डालने के लिए नामज़द कर सकती है। मौजूदा व्यवस्था के अंतर्गत कई बार वोट डालने के लिए नामज़द समिति सदस्य की अपनी सभा की समिति की अवधि पूरी हो जाती है, जिससे अन्य सभा जिसकी वह सदस्य है, के कामकाज में प्रतिनिधित्व पर प्रभाव पड़ता है। इस मुश्किल को दूर करने के लिए मंत्रीमंडल ने एक्ट की धारा 19 (2) में यह संशोधन स्वीकृत किया है ताकि सहकारी सभा किसी अन्य सभा, जिसकी वह मेंबर है, में वोट डालने के लिए अपने किसी योग्य सदस्य को नामज़द कर सके।
कैप्टन अमरिंदर सिंह
धारा 26 ( डी) और धारा 27 में संशोधन : प्रबंधकीय कमेटी के अस्तित्व में न रहने के कारण और प्रबंधकीय कमेटी को निरस्त/बर्खास्त किये जाने की सूरत में प्रशासक नियुक्त किया जाता है, जिसकी अवधि बैकिंग सभाओं के लिए अधिक से अधिक एक वर्ष और शेष सभाओं के लिए अधिक से अधिक 6 माह हो सकती है।
यह देखने में आया है कि इस तरह की स्थिति आने में सहकारी सभाओं में लंबे समय तक मुकद्दमेबाज़ी चलती रहती है और कई बार अदालतों द्वारा ऐसे मामलों में स्टे-आर्डर जारी किये जाते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए मंत्रिमंडल द्वारा उक्त धाराओं में स्पष्टीकरण जोड़ना स्वीकृत किया है ताकि अदालतों की कार्यवाही के कारण संबंधित सभा के चुनाव करवाने में जितने समय की भी देरी हो, वह समय प्रशासक की अवधि में शामिल नहीं माना जायेगा।
धारा 69 में संशोधन : इसके अनुसार सहकारी सभाओं और सदस्यों के कामकाज से संबंधी यदि कोई फैसला लिया जाता है या आदेश पास किया जाता है। इसकी अपील धारा 68 में उपलब्ध नहीं है तो ऐसे मामलों में रजिस्ट्रार या सरकार द्वारा संबंधित रिकार्ड को तलब करके किये हुए फ़ैसलों की समीक्षा की जा सकती है। लेकिन देखा गया है कि कि धारा 68 में अपील की व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद धारा 69 के अधीन काफी याचिकाएं दायर की जातीं हैं।
इसी तरह सहकारी सभाओं के कर्मचारियों के सेवा नियमों में दंड एवं अपील से संबंधित मामलों में अपील और समीक्षा की व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद धारा 69 के अधीन काफ़ी याचिकाएं दायर की जातीं हैं। ऐसे मामलों में एक्ट की धारा 69 में रजिस्ट्रार या सरकार के पास और समीक्षा याचिकाएं डालने की कोई व्यवस्था नहीं होनी चाहिए क्योंकि इस उद्देश्य के लिए संबंधित सभाओं के अपने-अपने सेवा नियम मौजूद हैं।
इसके अलावा रजिस्ट्रार या उनके अधीन आधिकारियों द्वारा पारित किये प्रशासकीय आदेशों के विरुद्ध भी समीक्षा पटीशनें दायर की जाती हैं। मंत्रीमंडल ने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए धारा 69 में जवाब तलबी शामिल करने को स्वीकृत किया है ताकि इस धारा के अधीन मुकदमेबाज़ी संबंधी कानूनी स्पष्टीकरण दिया जा सकेगा।