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पंजाब सरकार की 'मेहरबानी' पर बवाल : तीन मिनट में दो विधायकों के बेटे बने अफसर, ये बना नौकरी का आधार

Sat, 19 Jun 2021 11:36 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब कांग्रेस में अंतर्कलह के बाद से कैप्टन अमरिंदर सिंह नाराज विधायकों को साधने में जुटे हैं। ऐसी ही एक कवायद विधायकों के बच्चों को सरकारी नौकरी देकर की जा रही है। वहीं कैबिनेट की बैठक में दो विधायकों के बेटों को सरकारी नौकरी का प्रस्ताव पारित किया गया तो विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठा दिए।
 
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कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : twitter.com/capt_amarinder
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विस्तार
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पंजाब सरकार की एक 'मेहरबानी' से प्रदेश में सियासी बवाल खड़ा हो गया है। हुआ यह कि पंजाब मंत्रिमंडल ने दो विधायकों के बेटों को अफसर बनाने के प्रस्ताव को तीन मिनट में मंजूरी दे दी। सांसद प्रताप सिंह बाजवा के भतीजे और विधायक फतेहजंग बाजवा के बेटे अर्जुन प्रताप सिंह बाजवा को पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर (ग्रेड-2) और विधायक राकेश पांडे के बेटे भीष्म पांडे को राजस्व विभाग में नायब तहसीलदार नियुक्त किया गया। इस प्रस्ताव को विपक्षी दलों के कड़े विरोध के बावजूद मंत्रिमंडल ने सिर्फ तीन मिनट में पारित कर दिया। 

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मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को पारित करने के लिए अनुकंपा आधार पर नौकरी देने संबंधी नियमों में भी संशोधन किया, क्योंकि दोनों को अनुकंपा के आधार पर ही नौकरी दी गई है। इन दोनों के दादा पूर्व मंत्री सतनाम सिंह बाजवा और जोगिंद्र पाल पांडे की पंजाब में आतंकवाद के समय आतंकवादियों ने हत्या की थी। दोनों की नियुक्ति को अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियों संबंधी पॉलिसी, 2002 में एक बार छूट देकर विशेष केस के तौर पर माना गया है। हालांकि, इसे  प्रथा के तौर पर नहीं विचारा जाएगा। विपक्षी दलों-शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध भी किया। 

इस मामले को लेकर उठे सवालों पर सीएम अमरिंदर ने कहा है कि पंजाब कैबिनेट के फैसले को रद्द करने का कोई सवाल ही नहीं है। यह उनके परिवारों के बलिदान के लिए आभार और मुआवजे का एक छोटा सा प्रतीक है। यह शर्मनाक है कि कुछ लोग इस फैसले को राजनीतिक रंग दे रहे हैं।
 

अपनी कुर्सी बचाने के लिए विधायकों के बच्चों को नौकरी दे रहे कैप्टन: सुखबीर
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा अपनी कुर्सी बचाने के लिए कांग्रेस विधायकों के बच्चों को नौकरी देने के फैसले को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि 2022 में राज्य में शिअद-बसपा गठबंधन सरकार बनते ही ऐसी सभी अवैध नियुक्तियों को रद्द कर दिया जाएगा।

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अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जहां गरीब और मेधावी छात्र नौकरियों का इंतजार कर रहे हैं, कांग्रेस सरकार ने घर-घर नौकरी योजना को बदलकर केवल कांग्रेस घर नौकरी में बदल दिया है। पहले अनुकंपा के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते को डीएसपी नियुक्त किया गया था। अब कांग्रेसी विधायक फतेहजंग सिंह तथा राकेश पांडे को इंस्पेक्टर और नायब तहसीलदार के पद पर झूठे अनुकंपा के आधार पर नई नौकरियां पैदा कर नियुक्त किया गया है। 

सुखबीर ने नियुक्तियों को अवैध बताते हुए कहा कि उनके दादाओं की कथित कुर्बानी के बदले विधायकों के बच्चों को नौकरियां नहीं दी जा सकती हैं। यह निंदनीय है कि मुख्यमंत्री ने पंजाब कांग्रेस पार्टी में चल रही तकरार में अपनी कुर्सी बचाने के उद्देश्य से ऐसा कर अधिनियम को झूठा आधार दिया है। मुख्यमंत्री को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि 1987 में पूर्व मंत्री सतनाम सिंह बाजवा को गोली मारने पर केस दर्ज किया गया था। 

एफआईआर में कहा गया था कि सतनाम सिंह बाजवा को व्यक्तिगत मतभेद के आधार पर गोली मारी गई थी। इस मामले में कुर्बानी का तो सवाल ही पैदा नहीं होता, जिसके आधार पर बाजवा के पोते को उनके दादा की मौत के 33 साल बाद सरकारी नौकरी देकर पुरस्कृत किया जा रहा है।

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